आईबीबीआई ने किया कॉरपोरेट व्‍यक्तियों के दिवाला समाधान प्रक्रिया अधिनियम 2016 में संशोधन

 


भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कॉर्पोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया विनियम 2016 में बदलाव

भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कॉर्पोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया विनियम 2016 में बदलाव किए है। इस बदलाव से दिवालिया कार्यवाही में अनुशासन पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल को कॉर्पोरेट देनदारों को अपने नाम और अपने नए कार्यलाय का पते की जानकारी देनी होगी।

नई दिल्ली: भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कॉर्पोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया विनियम, 2016 में बदलाव किए है। इस बदलाव से दिवालिया कार्यवाही में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

एक कॉर्पोरेट देनदार दिवालिया होने से पहले अगर अपना नाम और पंजीकृत कार्यालय का पता बदल लेता है, तो स्टेकहोल्डरों को नए नाम या पंजीकृत कार्यालय के पते से तालमेल की दिक्कतें हो सकती हैं और परिणामस्वरूप वे कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में भाग लेने में विफल हो सकते हैं। इस संशोधन के तहत दिवाला पेशेवर (इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल) को कॉर्पोरेट देनदारों को अपने नाम और अपने नए कार्यालय के पते के साथ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से दो साल पहले तक की जानकारी देनी होगी।

नए संशोधन के तहत अगर अंतरिम समाधान पेशेवर या समाधान पेशेवर कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के संचालन में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता के लिए किसी भी पेशेवर को नियुक्त कर सकता है। इस प्रकार की नियुक्तियां एक उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करते हुए निष्पक्ष आधार पर की जाएंगी।रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल यह पता लगाने के लिए बाध्य है कि क्या कॉर्पोरेट देनदार, कम मूल्य वाले लेनदेन, जबरन उधारी लेनदेन, खरीद-फरोख्‍त में धोखाधड़ी और गलत तरीके से खरीद-फरोख्‍त जैसे विवादित लेनदेन से संबंधित है। यदि ऐसा पाया जाता है तो एडजुकेटिंग अथॉरिटी यानी न्‍यायिक अधिकारी के पास इसकी शिकायत दायर की जा सकती है। इससे न केवल ऐसे लेनदेन में खोए हुए मूल्य की वापसी होगी, बल्कि इस प्रकार के लेनदेन को भी रोका जा सकेगा ताकि कॉर्पोरेट देनदार पर भी दबाव न पड़े।