पांच अगस्त 2019 के बाद अब नहीं बनना चाहता काेई भी आतंकवाद का पोस्टर ब्वाय

 


इंटरनेट मीडिया पर आतंकियों के समर्थक ट्विटर हैंडल या फेसबुक पेज भी अब पहले की तरह नजर नहीं आते।

इंटरनेट मीडिया पर अब कश्मीरी आतंकी नजर नहीं आते। अगर कोई आतंकी बनता है तो वह एलान भी नहीं करता उसके समर्थक भी उसकी तस्वीरें उसके वीडियो को वायरल करना तो दूर सार्वजनिक जगहाें पर उसका नाम तक नहीं लेते।

श्रीनगर। इंटरनेट मीडिया पर अब कश्मीरी आतंकी नजर नहीं आते। अगर कोई आतंकी बनता है तो वह एलान भी नहीं करता, उसके समर्थक भी उसकी तस्वीरें, उसके वीडियो को वायरल करना तो दूर सार्वजनिक जगहाें पर उसका नाम तक नहीं लेते। 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू कश्मीर में लगातार सुधर रहे सुरक्षा परिदृश्य में अगर कश्मीरी अवाम ने सबसे ज्यादा कोई सुखद बदलाव महसूस किया है तो यही कि अब कोई भी आतंकियाें का पोस्टर ब्वाय नहीं बनना चाहता। अगर काेई बंदूक उठाता है तो सिर्फ वही नहीं उसके हैंडलर भी कोशिश करते हैं कि किसी को पता न चले। कोई आतंकियों का महिमा मंडन नहीं कर रहा है। इंटरनेट मीडिया पर आतंकियों के समर्थक ट्विटर हैंडल या फेसबुक पेज भी अब पहले की तरह नजर नहीं आते।

आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्ती में इंटरनेट मीडिया की भूमिका सबसे अहम रही है

जम्मू कश्मीर की आतंकी हिंसा पर नजर रखने वाले और आम कश्मीरी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि वादी में 2013 के बाद आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्ती में इंटरनेट मीडिया की भूमिका सबसे अहम रही है। आतंकी संगठनों ने आठ जुलाई 2016 को मारे गए आतंकी बुरहान काे अपने पोस्टर ब्वाय की तरह इस्तेमाल किया था। बुरहान के आतंकी बनने के बाद से ही उसकी तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर अक्सर वायरल हाेती थी, लेकिन 2015 में उसने अपनेे साथियों संग एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल की और उसके बाद जो भी आतंकी बनता, वही अपनी तस्वीर को वायरल करता। बुरहान की मौत के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा। आतंकी कमांडर जाकिर मूसा, रियाज नाइकू व अन्य कई आतंकी कमांडराें ने इंटरनेट मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया और आतंकियों को एक नायक बनाने का प्रयास किया। आतंकियों के जनाजों में भीड़ की तस्वीरें, अपने साथियों के जनाजे में गाेलियां दागते आतंकियों का हीरों की तरह पेश किया। इससे आतंकी संगठनों के लिए नए लड़कों की भर्ती तेज हुई ,क्याेंकि उन्हें लगता था कि वह स्थानीय समाज का आदर्श बनने जा रहा हैं।

सिर्फ द रजिस्टेंस फ्रंट जम्मू कश्मीर ही नए लडकों के आतंकी बननेे का एलान कर रहा है

अलबत्ता, अब स्थिति बदल गई है। इस साल भी 60-70 लड़के अपने घराें से गायब हुए हैं। इनमें से अधिकांश आतंकी बने हैं और कुछेक लड़काें ने ही शायद इंटरनेट मीडिया पर अपनी तस्वीर वायरल की हो या आतंकी बनने की पुष्टि की हो। उन्होंने कहा कि बीते दो सालों के दौरान करीब एक दर्जन लड़कों ने ही सोशल मीडिया पर आतंकी बनने का एलान किया है। इनमें तीन चार लड़के अल-बदर से थे । इस समय सिर्फ द रजिस्टेंस फ्रंट जम्मू कश्मीर ही नए लडकों के आतंकी बननेे का एलान कर रहा है और वह भी तब जब टीआरएफ का काेई आतंकी मारा जाता है ताेे उसके बाद वह तस्वीर नहीं सिर्फ आडियो मैसेज जारी कर रहा हैे।

आतंकियों की नयी पौध तैयार करने में मुश्किल हो रही है

दो दिन पहले शोपियां में मारे गए दो आतंकियाे में शामिल माजिद ने आतंकी बनने पर काेई तस्वीरें जारी नहीं की थी। इससे पूर्व पांच जुलाई को हांजिन पुलवामा में मारे गए पांच आतंकियो ने भी कई आतंकी बनने का एलान नहीं किया था। पुलवामा में 14 जुलाई को मारे गए पीएफएफ के आतंकियों में एक माेहम्मद सलीम के बारे में भी किसी को नहीं पता था। कश्मीर में लश्कर के प्रमुख कमांडरों में शामिल खालिद, हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर अशरफ माैलवी, जैश आतंकी समीर डार को काेई आडियो, वीडियो या तस्वीर पांच अगस्त 2019 के बाद नहीं देखी गई है। सिर्फ पुरानी तस्वीरें ही किसी के पास मिल सकती हैं। अब कोई पोस्टर ब्वाय नहीं बनना चाहता। आतंकी संगठन भी इससे परेशान हैं, क्योंकि इससे उन्हें अपना एजेंडा आगे बढ़ाने, आतंकियों की नयी पौध तैयार करने में मुश्किल हो रही है।

जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि आम कश्मीरी भी अक्सर प्रशासन से आग्रह करता था कि अगर कश्मीरी नौजवानाें को जिहादियों से बचाना है तो सबसे पहले इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने वाली आतंकियों की तस्वीरें और उनके महिमामंडन पर रोक लगाई जाए। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भी समय समय पर इसके बारे में संबधित प्रशासन को लिखा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पांच अगस्त 2019 के बाद स्थिति बदल गई, क्योंकि अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद यहां निजाम पूरी तरह बदल गया और उसका असर अब यहां के सुरक्षा परिदृश्य में है। इसका असर आतंकी संगठनों में नए लड़कों की भर्ती में कमी में नजर आता है। इसके अलावा अगर कोई लड़का आतंकी बनता हैै ताे बहुत कम लाेगों को उसका पता चलता है। ऐसे में उसेे वापस लाना और मुख्यधारा में उसे पुनर्वासित करना भी आसान रहता है। इस साल करीब दो दर्जन के करीब लड़कों को आतंकियाें की चंगुल से मुक्त कराया गया है।

पांच अगस्त 2019 के बाद इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय जिहादियों की फौज भी लगातार घटी है

साइबर सेल कश्मीर के प्रभारी एसपी ताहिर अशरफ के अनुसार, पांच अगस्त 2019 के बाद इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय जिहादियों की फौज भी लगातार घटी है। हमने ऐसे कई जिहादी तत्वों का चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है। कईयाें को गिरफ्तार किया गया है। कई ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज बंद कराए गए हैं। पुलिस आज इस मामले में पूरी तरह प्रो एक्टिव है। अातंकी भी अब इंटरनेट मीडिया या फेसबुक का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं, अपनी तस्वीरें वायरल नहीं करते, क्योंकि उन्हें पता है कि जैसे ही वह ऐसा कुछ करेंगे, पकड़े जाएंगे या मारे जाएंगे। इसलिए अाज वह अपनी जान बचाने के लिए गुमनाम बने हुए हैं। कल तक जो उनके ग्लैमर था, आज वही उनकी मौत का सामान बन चुका है।

कश्मीर मामलो के विशेषज्ञ रमीज मखदूमी ने कहा कि पांच अगस्त 2019 के बाद अगर कोई सबसे बड़ा बदलाव अगर अाया है तो वह बंदूक की संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाले तत्वों पर लगाम है। अब इंटरनेट मीडिया पर आतंकी बनने वालों की तस्वीरें या एलान नहीं मिलते। आतंकियों के जनाजों का काेई जिक्र नहीं करता। आतंकियों को राबिनहुड या हीरो की तरह पेश नहीं किया जा रहा है। इससे कश्मीर के कई नौजवान आतंकी बनने से बचे हैं। अन्यथा, आतंकियों के लिए नए लड़कों की भर्ती का यह सबसे आसान तरीका बन चुका था। अब काेई आतंकियों के वीडियो भी आपस में शेयर नहीं करता।