कोरोना से उबरे 22 फीसद मरीज हुए 'लॉन्‍ग कोविड सिंड्रोम' के शिकार, आप भी हुए हैं संक्रमित तो रहे सावधान

 



मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने या क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के दौरान कुछ लक्षण बरकरार थे

इस बीमारी में ब्लड क्लाट की समस्या भी देखी जा रही है। फेफड़े में संक्रमण की वजह से लंबे समय तक सांस लेने में परेशानी हो सकती है। मध्यम व गंभीर संक्रमण के मरीजों के इलाज में कई तरह की दवाएं चलती है।

नई दिल्‍ली। कोरोना से अगर आप जंग जीत भी चुके हैं, तो भी सावधानी बरतने की जरूरत है। दरअसल, एम्स के अध्ययन में यह पता चला है कि संक्रमण का शिकार होने वाले 22 फीसद मरीज तीन से छह माह तक अलग-अलग बीमारियों से जूझते रहे हैं। डाक्टर कहते हैं कि घबराएं नहीं, कोरोना से उबरने के बाद सतर्कता बरतें और किसी तरह की परेशानी होने पर डाक्टर से तत्काल संपर्क करें।

एम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व अध्ययन करने वाली टीम के सदस्य डा. नीरज निश्चल ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम के एनआइसीई (नेशनल इंस्टीट्यूट फार हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस) द्वारा तय मानक के अनुसार चार से 12 सप्ताह या उससे अधिक समय तक लक्षण बरकरार रहने पर लॉन्‍ग कोविड सिंड्रोम कहा जाता है। इस बीमारी में ब्लड क्लाट की समस्या भी देखी जा रही है। फेफड़े में संक्रमण की वजह से लंबे समय तक सांस लेने में परेशानी हो सकती है। मध्यम व गंभीर संक्रमण के मरीजों के इलाज में कई तरह की दवाएं चलती है। सकारात्मक सोच, सांस से संबंधित योग व व्यायाम से इस पर काबू पाया जा सकता है।

ऐसे किया गया अध्ययन

-साल की औसत उम्र वाले मरीजों पर किया गया अध्ययन

-मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए थे, जो औसतन 11 दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे।

-मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने या क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के दौरान कुछ लक्षण बरकरार थे।

-पुरुष मरीज थे

-मरीजों को कम से कम एक बीमारी थी

अध्ययन का निष्कर्ष

22 फीसद मरीजों में लांग कोविड देखा गया। इनमें से 12.1 फीसद मरीजों में तीन माह तक व 9.9 फीसद मरीजों में तीन माह के बाद भी लक्षण बरकरार थे।