लुधियाना से शुरू हुआ था पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का सफर, पहले ही मैच में खेली थी 260 रन की पारी


पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा की फाइल फाेटाे।

लुधियाना में जन्मे यशपाल शर्मा भले ही दिल्ली जाकर बस गए लेकिन वह लुधियाना की यादों को कभी नहीं भूल पाए। यशपाल हमेशा कहते थे कि उन्हें लुधियाना की जमीन ने विश्व कप की टीम तक पहुंचाया और वह लुधियाना को कुछ वापस देना चाहते हैं।

लुधियाना।  भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज यशपाल शर्मा  का क्रिकेट सफर लुधियाना से ही शुरू हुआ था। दाएं हाथ के धाकड़ बल्लेबाज यशपाल ने पंजाब की तरफ से जम्मू-कश्मीर के खिलाफ खेलते हुए 260 रनों की बेहतरीन पारी खेली और वहीं से इनका स्वर्णिम क्रिकेट सफर शुरू हो गया।

औद्योगिक नगरी लुधियाना के विश्व कप 1983 की भारतीय टीम के सदस्य बनने वाले यशपाल शर्मा का जन्म मशहूर लक्कड़ पुल के पास 11 अगस्त 1954 को हुआ था। दोस्तों के साथ गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका चयन पंजाब स्कूल टीम में हो गया था। यशपाल  के निधन पर शहर में शाेक की लहर है।

लुधियाना के बच्चों को क्रिकेट के हुनर सिखाने की ठानी थी यशपाल ने

लुधियाना में जन्मे यशपाल शर्मा भले ही दिल्ली जाकर बस गए, लेकिन वह लुधियाना की यादों को कभी नहीं भूल पाए। वह हमेशा कहते थे कि उन्हें लुधियाना की जमीन ने विश्व कप की टीम तक पहुंचाया और वह शहर को कुछ वापस देना चाहते हैं।लगभग चार साल पहले एक बार वह लुधियाना क्रिकेट अकादमी पहुंचे और कहा कि वह नियमित तौर पर यहां नहीं रह सकते, लेकिन वह समय-समय पर आकर अकादमी के बच्चों को ट्रेनिंग देंगे। वह चाहते थे कि जिस तरह मैं लुधियाना में पैदा होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बना, उसी तरह अन्य बल्लेबाज भी आगे आएं। अकादमी के कुछ खिलाड़ियों से वह काफी प्रभावित भी हुए थे।

दोस्त के बेटे को गिफ्ट में दिया था बल्ला

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में कार्यरत केके अवस्थी से दिग्गज क्रिकेटर यशपाल के घरेलू संबंध थे। वे वर्ष 1983 में विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहने के बाद जब दोस्त के सूटरगंज स्थित आवास पर पहुंचे तो उनके बेटे अविनाश को अपना बल्ला गिफ्ट दिया था। केके अवस्थी बताते हैं, उनका खेल व खिलाड़ियाें के प्रति हमेशा सकारात्मक व्यवहार रहा, जिससे वह क्रिकेट प्रेमियों के दिल में राज करते हैं।