हरियाणा-पंजाब में माननीयों के खिलाफ जांच में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, रजिस्ट्रार जनरल से 27 तक मांगी रिपोर्ट


पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने माननीयों के खिलाफ चल रहे केसों में जांच में देरी पर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। हाई कोर्ट ने मामले में रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि वह मामले की जांच कर रिपोर्ट दें।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। माननीयों पर दर्ज आपराधिक मामलों की जांच में देरी पर संज्ञान के मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि वो इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी पत्र को देखें और जांच कर रिपोर्ट दे कि क्या सभी संबंधित जारी आदेश की पालना कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को इस बाबत जवाब दायर करने को कहा है।

हाई कोर्ट ने यह आदेश इस मामले में कोर्ट मित्र द्वारा उठाए गए सवालों पर जारी किया। कोर्ट मित्र ने कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ कई मामले में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी गई , इस तरह के मामले की रोक पर विचार करना जरूरी है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि पंजाब के एक प्रमुख राजनेता के खिलाफ लुधियाना में केस चल रहा है। केंद्र तीन दिन में इस बाबत हलफनामा दायर कर जानकारी देगा। सीबीआइ की तरफ से भी हाई कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई।

इस मामले हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि प्रदेश में माननीयों पर 68 केस लंबित हैं। इन मामलों में से 21 में ट्रायल चल रहा है और 44 में अभी जांच जारी है। इसके अतिरिक्त तीन मामलों को सीबीआइ को रेफर किया गया है। जिन तीन मामलों को सीबीआइ को भेजा गया है, उनमें दो केस पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ हैं। एक केस पूर्व एमएलए जिले राम शर्मा व ओम प्रकाश जैन के खिलाफ है।

हाई कोर्ट को बताया गया कि जिन माननीयों पर केस दर्ज हैंं, उनमें हरियाणा के 7 पूर्व एमएलए, हिमाचल के 2 पूर्व एमएलए व दिल्ली का एक पूर्व एमएलए शामिल हैं। हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। केंद्र सरकार ने बताया कि पंजाब के पूर्व एमएलए अनिवाश चंद्र व स्वर्ण सिंह फिल्लौर के खिलाफ मामला लंबित है और 68 में से 63 लोगों की गवाही हो चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर 28 जनवरी 2019 को रोक लगा दी थी।

यह है मामला

अश्वनी कुमार बनाम केंद्र सरकार मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सांसदों और विधायकों पर लंबित मामलों की जानकारी मांगी थी। कोर्ट को पता चला कि देशभर के 1765 माननीयों के खिलाफ 3045 आपराधिक मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की निगरानी के लिए हर हाई कोर्ट को हर तीन माह के भीतर एक सुनवाई करने का आदेश दिया था, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके। हर सुनवाई पर आइजी स्तर के अधिकारी को कोर्ट में मौजूद रहने का भी निर्देश जारी किया था। इसी के तहत हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है।