फरीदकोट के डीसी ऑफिस में 400 तोतों की मौत पर एनजीटी के जांच के आदेश, जानें क्या है पूरा मामला


पिछले महीने लगभग 400 तोतों की जामुन के पेड़ों के नीचे अचानक मौत हो गई थी। File फोटो

पिछले महीने फरीदकोट के डीसी आफिस परिसर में 400 तोतों की मौत का मुद्दा समाजसेवी पर्यावरण प्रेमी व पक्षी प्रेमियों समेत अन्य संस्थाओं ने मीडिया के माध्यम से बुलंद किया। इसके बाद एडवोकेट एचसी अरोड़ा की अगुआई में एनजीटी के समक्ष मामला उठाया गया था।

संवाद सहयोगी, फरीदकोट। शहर के डीसी आफिस परिसर (मिनी सचिवालय) में पिछले महीने लगभग 400 तोतों की जामुन के पेड़ों के नीचे अचानक हुई मौतों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जांच के आदेश दे दिए हैं। पिछले महीने हुई इस घटना ने पक्षी प्रेमियों को झंझोड़ कर रख दिया था। तोतों की मौत का मुद्दा समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी व पक्षी प्रेमियों समेत अन्य संस्थाओं ने मीडिया के माध्यम से बुलंद किया। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर पर्यावरण प्रेमी एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने फरीदकोट के संदीप अरोड़ा और मासूम परवाज वेलफेयर सोसायटी के शंकर शर्मा के साथ तालमेल करके तोतों की अप्राकृतिक मौत संबंधी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पास पिटीशन डाली थी।

वर्ष 2017 से हर साल हो रही हैं तोतों की मौतें

पिटीशन में एडवाेकेट अराेड़ा ने आराेप लगाया कि 11 जून काे करीब 400 ताेते फरीदकाेट डीसी आफिस में केमिकल स्प्रे किए जाने के कारण मृत मिले थे। उन्हाेंने कहा कि इस तरह की माैतें वर्ष 2017 से हर साल हाेती आ रही हैं। इन्हें मीडिया में भी उठाया जाता रहा लेकिन इन्हें रोकने को कोई कदम नहीं उठाया गया। इस पर एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गाेयल ने 9 जुलाई काे पंजाब के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन काे तोतों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के निर्देश दे दिए 

एनजीटी ने इसी के आधार पर सख्त नोटिस लेते हुए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पंजाब को पर्यावरण विशेषज्ञ की सहायता से तोतों की मौत की जांच करने के निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया है कि वह इस चीज का पता लगाएं कि इतनी ज्यादा संख्या में तोतों की मौत किन कारणों से हुई है और जांच मुकम्मल होने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम भी उठाएं। सोसायटी के प्रधान सर गुरमीत सिंह संधू और मासूम परवाज वेलफेयर सोसायटी के प्रधान शंकर शर्मा ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा की इस पहलकदमी के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से जहरीली वस्तु के सेवन से पक्षियों की हो रही मौत रोकने के लिए यह पहला कदम है।