कराकोरम रेंज की ब्रॉड पीक से उतरते समय फिसले जाने माने पर्वतारोही किम, 48 घंटों बाद भी नहीं मिला सुराग

 


दुनिया के जाने माने पर्वतारोही हुए हादसे का शिकार

दिव्‍यांग होने के बाद भी दुनिया की सभी ऊंची चोटियों पर अपनी कामयाबी का झंडा लहराने वाले किम होंग बिन पाकिस्‍तान की के-2 से उतरते हुए फिसल गए हैं। ये हादसा ऊंचाई पर मौसम के अचानक खराब होने से हुआ था।

इस्‍लामाबाद (एपी)। दक्षिण कोरिया के प्रसिद्ध पर्वतारोही किम होंग बिन पाकिस्‍तान की उत्‍तरी कराकोरम पर्वतमाला से उतरते हुए हादसे का शिकार हो गए हैं। पाकिस्‍तान एल्‍पाइन क्‍लब के सचिव करार हैरदी का कहना है कि वो करोकोरम रेंज की ब्रॉड पीक से उतरते हुए फिसल गए और चीन की तरफ कहीं गिर गए हैं। उनका अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। ये हादसा रविवार को चोटी पर करीब 26400 फीट की ऊंचाई पर अचानक खराब हुए मौसम के बाद हुआ था।

हैदरी का कहना है कि उनकी तलाश लगातार जारी है लेकिन अब तक उनकी कोई जानकारी हाथ नहीं लग सकी है। आपको बता दें कि किम दुनिया की सभी ऊंची चोटियों को फतह कर चुके हैं। इस कारनामे को करने वाले वो दुनिया के पहले दिव्‍यांग पर्वतारोही हैं। 1991 में अलास्‍का समिट के दौरान हुए हादसे में उनकी हाथ की सभी अंगुलियों को काटना पड़ गया था।

52 वर्षीय किम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्‍ट, विश्‍व की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के-2 पर अपनी कामयाबी का झंडा लहराया है। हैदरी ने बताया कि किम के आड़े कभी उनकी दिव्‍यांगता नहीं आ सकी। अपने बुलंद हौसलों की बदौलत उन्‍होंने बड़ी से चोटी को अपने कदमों के नीचे ला दिया था। अधिकारी का कहना है कि किम की तलाश में दूसरे पर्वतारोही भी लगे हुए हैं।पाकिस्‍तान स्थित दक्षिण कोरिया के दूतावास ने भी किम की तलाश के लिए एक अभियान शुरू करने का एलान किया है। हैदरी का कहना है कि किम को लेकर वो फिलहाल कोई कयास नहीं लगा रहे हैं। उन्‍होंने ये जवाब उस वक्‍त दिया जब एपी के रिपोर्टर ने ये जानना चाहा था कि कहीं इस हादसे में उनकी मौत तो नहीं हो गई है। जिस एक्‍पेडिशन पर किम निकले थे उसका आयोजन ब्‍लू स्‍काई एक्‍सपेडिशन कंपनी के गुलाम मोहम्‍मद ने किया था।

उन्‍होंने इसको दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया है। एपी ने दक्षिण कोरिया के अधिकारी के हवाले से बताया है कि गुलाम मोहम्‍मद लगातार किम के परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं। तलाशी अभियान से मिलने वाली हर जानकारी को उन तक पहुंचाया जा रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्‍तान में हर वर्ष सैकड़ों की संख्‍या में पर्वतारोही ऊंची चोटियों को फतह करने के लिए आते हैं। पाकिस्‍तान के ऊत्‍तर में मौजूद ये चोटियां दुनिया के हर कोने से पर्वतारोहियों को अपनी तरफ खींचती हैं। हालांकि ये काफी खतरनाक होती हैं। खासतौर पर मौसम के अचानक खराब होने के बाद खतरा बढ़ जाता है।

इस वर्ष की शुरुआत में भी तीन पर्वतारोही के-2 की 28250 फीट की ऊंचाई पर हादसे का शिकार हो गए थे। कई तलाश अभियान चलाए जाने के बाद भी इनका कुछ पता नहीं चल सका था। हादसे के शिकार हुए पर्वतारोहियों में पाकिस्‍तान के अली सदपारा, आइसलैंड के जॉन स्‍नोरी और चिली के जुआन पाब्‍लो मोहर शामिल थे।