मनोहर लाल को पाकिस्तानी कहकर घिरे गुरनाम सिंह चढ़ूनी, BJP विधायक बोले- देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो


महंगा पड़ेगा किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी मनोहर लाल को पाकिस्तानी कहना

हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन और पृथला विधानसभा से भाजपा विधायक नयनपाल रावत ने कहा है कि भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी गुट के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

नई दिल्ली/पलवल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पाकिस्तानी कहने पर गृहमंत्री अनिल विज, परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के बाद अब हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन नयनपाल रावत ने कहा है कि भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी गुट के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। दिल्ली से सटे पलवल जिले के पृथला क्षेत्र के विधायक नयनपाल रावत का कहना है कि वह जिस क्षेत्र से चुने गए हैं वहां लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यदि किसान संगठनों का आंदोलन तथ्यात्मक होता तो उनके क्षेत्र के किसान भी इस आंदोलन का हिस्सा होते।

गुरनाम के बारे में नयनपाल रावत ने कहा कि राज्य के गृहमंत्री अनिल विज ठीक कह रहे हें कि ऐसे राजनीति से प्रेरित नेताओं को सबक सिखाने के लिए जनता को भी सड़कों पर आना होगा। नयनपाल रावत के अनुसार गुरनाम मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पाकिस्तानी कहकर हरियाणा की तीन करोड़ जनता का अपमान कर रहा है। गुरनाम को पता नहीं है कि यदि मनोहर लाल पाकिस्तानी होते तो फिर उनके पूर्वज पाकिस्तान छोड़कर भारत नहीं आते। मनोहर लाल तो देशभक्त भारतीय हैं। विधायक रावत ने कहा कि गुरनाम के खिलाफ सरकार को तत्काल प्रभाव से राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए। अन्यथा वे विधानसभा के मानसून सत्र में चढूनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने संबंधी मांग रखेंगे।

राजनीति से प्रेरित है किसान संगठनों का आंदोलन

परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा का कहना है कि किसान संगठनों का आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। शर्मा ने कहा कि किसानों की सरकार से कोई समस्या नहीं है। किसान संगठनों के नाम पर गुरनाम जैसे नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए सक्रिय हैं। इन्हें जब किसान का साथ नहीं मिलता तो ये फरीदाबाद में खोरी बस्ती पहुंच जाते हैं। जहां सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही है। परिवहन मंत्री के अनुसार देश का अन्नदाता किसान अपने खेत में मेहनत मजदूरी कर रहा है जबकि किसान संगठनों के ये तथाकथित प्रतिनिधि राजनीति चमका रहे हैं।