पंचायत चुनाव से खत्म होगा धनबल-बाहुबल, अगली बार जनता चुनेगी जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख!


भाजपा सरकार तैयारी कर रही है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख सीधे जनता के वोट से चुने जाएं।

भाजपा सरकार संविधान संशोधन कराते हुए यह व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख सीधे जनता के वोट से चुने जाएं। संकेत हैं कि यूपी सरकार के इन प्रयासों पर केंद्र सरकार अन्य राज्यों की सहमति लेकर अगले चुनाव तक प्रक्रिया बदल दे।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। धनबल-बाहुबल और अराजकता से घिरे नजर आने वाले पंचायत चुनावों से अब शायद यह दाग-धब्बे साफ हो जाएं। भाजपा सरकार संविधान संशोधन कराते हुए यह व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है कि महापौर और पार्षदों की तरह जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख सीधे जनता के वोट से चुने जाएं। स्पष्ट संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के इन प्रयासों पर केंद्र सरकार अन्य राज्यों की सहमति लेकर अगले चुनाव तक प्रक्रिया बदल दे।

हाल ही में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव हुए हैं। तमाम जिले और ब्लाक में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए। चूंकि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख का जनता के वोट के बजाए जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के वोट से होता है, इसलिए यह चुनाव धनबल-बाहुबल के आरोप में हमेशा घिरे रहते हैं।

भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी पर जीरो टालरेंस का संदेश देने वाली भाजपा सरकार चाहती है कि नगर निकाय में महापौर और पार्षदों की तरह ही जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख भी जनता के वोट से चुने जाएं। अंदरखाने शुरू हुए इन प्रयासों का संदेश उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान से मिला है। सोमवार को प्रयागराज में जिला पंचायत अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में यह इशारा कर चुके केशव प्रसाद ने 'दैनिक जागरण' से बातचीत में स्पष्ट कहा कि वह पंचायत चुनाव की व्यवस्था में यह बदलाव कराने का पुरजोर प्रयास करेंगे, ताकि अगला चुनाव पूरी तरह पारदर्शी ढंग से हो।

केंद्र सरकार को करना होगा संविधान में संशोधन : राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के लिए केंद्र सरकार को संविधान में संशोधन करना होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राज्यों से इस पर सहमति भी लेनी होगी। चूंकि इस समय केंद्र के साथ कई राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए प्रस्ताव की स्वीकृति में कोई बाधा आने की आशंका नहीं है। आयोग के अफसरों का कहना है कि महापौर-पार्षद की तरह जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख का चुनाव सीधे जनता से कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।

वक्त रहता तो इसी बार हो जाता बदलाव : ऐसी नहीं कि यह सिर्फ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सोच या संकल्प है, बल्कि भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार इस दिशा में पहले ही प्रयास शुरू कर चुकी है। पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यही चाहते हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख का चुनाव जनता के वोट द्वारा पारदर्शी ढंग से हो। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार को पहले ही व्यवस्था में परिवर्तन के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। चूंकि, पंचायत चुनाव का निर्धारित वक्त करीब था। प्रक्रिया बदलने से व्यवधान होता, इसलिए इस बार पुरानी प्रक्रिया से चुनाव कराए हैं, लेकिन प्रयास यही है कि अगली बार पंचायत चुनाव होने तक व्यवस्था बदल जाए।