बच्चों को संक्रमित नहीं कर पाएगी कोरोना की तीसरी लहर, डाक्टरों का दावा- अधिकांश में विकसित हो चुकी है एंटीबाडी


लक्षण ना दिखने के कारण संक्रमण का पता नहीं चल सका : डॉक्टर्स

चिकित्सकों का कहना है कि यह सभी बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके थे लेकिन कोई लक्षण नहीं होने के कारण उनके परिजनों को पता नहीं चला। ये बच्चे खुद ब खुद ठीक भी हो गए तथा कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए प्रोटीन कोशिकाएं (एंटीबाडी) अर्जित कर चुके हैं।

नई दिल्ली,  संवाददाता। कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को संक्रमित नहीं कर पाएगी, क्योंकि अधिकांश में एंटीबाडी विकसित हो चुकी है। यह दावा है कोलकाता के इंस्टीट्यूट आफ चाइल्ड हेल्थ के चिकित्सकों का। हाल ही में इस बाल स्वास्थ्य संस्थान में 18 साल से कम उम्र के 100 बच्चों के लिए कोरोना टीके का ट्रायल शुरू किया गया था। 50 से अधिक बच्चों को जाइडस कैडिला का टीका नहीं लगाया जा सका, क्योंकि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबाडी पाई गई है।

चिकित्सकों का कहना है कि दरअसल यह सभी बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके थे, लेकिन कोई लक्षण नहीं होने के कारण उनके परिजनों को पता नहीं चला। ये बच्चे खुद ब खुद ठीक भी हो गए तथा कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए प्रोटीन कोशिकाएं (एंटीबाडी) अर्जित कर चुके हैं। चिकित्सकों का मानना है कि देश में बड़ी संख्या में बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन उनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं दिया है।

हर तीन में से दो लोगों में मिली कोरोना की एंटीबॉडी : आइसीएमआर

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के सीरो सर्वे में सामने आया है कि देश में हर तीन में से दो व्यक्ति में कोरोना की एंटीबाडी बन चुकी है। आइसीएमआर के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव ने बताया कि यह सर्वे जून-जुलाई में कराया गया और इनमें 6-17 साल के बच्चों को भी शामिल किया गया था। सर्वे में देखा गया है कि 67.6 फीसद लोगों में कोरोना की एंटीबाडी पाई गई। वहीं, सीरो सर्वे के मुताबिक, अभी भी देश में करीब 40 करोड़ यानी 33 फीसद आबादी वो है, जिनमें कोरोना की एंटीबाडी नहीं पाई गई है और इन लोगों के कोरोना वायरस की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है।