ग्यारह साल पहले पुलिसकर्मी पर कथित जानलेवा हमला मामले में कोर्ट को नहीं मिला पर्याप्त साक्ष्य, चार आरोपित बरी, पढ़िए पूरी घटना

 


पर्याप्त साक्ष्य न होने पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

नंद नगरी इलाके में पहलवान ढाबा के सामने पार्क में 2009 के बीच रात को हेड कांस्टेबल ओंकार सिंह पर जानलेवा हमलाकर सर्विस रिवाल्वर लूटने की घटना को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ था। हेड कांस्टेबल ने रोक-टोक की तो चारों ने मिल कर पीटा और ईंट से सिर फोड़ दिया।

नई दिल्ली,  संवाददाता। नंद नगरी इलाके में 12 साल पहले पुलिस कर्मी पर कथित जानलेवा हमला कर सर्विस रिवाल्वर लूटने के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने चार लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील पर सहमति जताते हुए कहा चश्मदीद गवाह झूठा प्रतीत होता है।

डंडे की जगह बेस बाल बैट की बरामदगी होना, बैट पर खून के धब्बे न मिलना और उसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला न भेजना समेत कई चूक जांच एजेंसी ने की है। जिससे यह मामला संदेहास्पद प्रतीत होता है। पर्याप्त साक्ष्य न होने पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

नंद नगरी इलाके में पहलवान ढाबा के सामने पार्क में 12-13 मार्च 2009 के बीच की रात को हेड कांस्टेबल ओंकार सिंह पर जानलेवा कर सर्विस रिवाल्वर लूटने की घटना को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप था कि साहिबाबाद डीएलएफ दिलशाद कालोनी निवासी सोनू गुप्ता उर्फ राजू, नंद नगरी निवासी संतोष उर्फ पप्पू यादव, मुहम्मद इमाम उर्फ इमामुद्दीन और बहेटा हाजीपुर गाजियाबाद निवासी साबिर उर्फ बड़ा राजू पार्क में बैठ कर शराब पी रहे थे। हेड कांस्टेबल ने रोक-टोक की तो चारों ने मिल कर उनको बेरहमी से पीटा और ईंट से सिर फोड़ दिया।

यह आराेप भी था कि चारों ने उनकी सर्विस रिवाल्वर, चार कारतूस और अन्य सामान लूट लिया। इस मामले में रिक्शा चालक भीम सिंह को चश्मदीद गवाह के रूप में पेश किया गया था। बचाव पक्ष की तरफ से सवाल खड़ा किया गया कि पीड़ित हेड कांस्टेबल ने बयान में डंडे से पीटने का जिक्र किया था। जबकि बरामदगी बेसबाल बैट की हुई थी। बरामदगी के दौरान न साइट प्लान नहीं बनाया और न ही बरामदगी का कोई गवाह पेश।

इस बैट को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भी नहीं भेजा गया। चश्मदीद गवाह ने घटना की 12-13 मार्च 2010 की बताई थी, जबकि घटना वर्ष 2009 मं हुई थी। इसे आधार बनाकर बचाव पक्ष ने चश्मदीद गवाह को झूठा करार दिया था। हेड कांस्टेबल ओंकार सिंह को रिवाल्वर थाने से दी गई थी। रिकार्ड में रिवाल्वर दिए जाने की तारीख नहीं लिखी थी। पार्क से शराब की बोतल, गिलास और खाद्य सामग्री भी जुटाकर साक्ष्य के रूप में पेश नहीं की गई थी। जिसे कोर्ट ने जांच एजेंसी की चूक मानते हुए चारों आरोपितों को बरी कर दिया।