गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ेंगे ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी के छात्र !


शिक्षा निदेशालय ने 15 जून, 2021 को जारी अपने आदेश में लगभग 2050 निजी स्कूलों की सूची जारी की।

शिक्षा निदेशालय ने 15 जून 2021 को जारी अपने आदेश में लगभग 2050 निजी स्कूलों की सूची जारी की। इन स्कूलों में कंप्यूटराइज्ड ड्रा के तहत तकरीबन 32500 ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी के छात्रों की नर्सरी केजी और कक्षा एक में सीटें आवंटित की गई है।

नई दिल्ली। राजधानी के स्कूलों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से पिछड़े) और डीजी (वंचित समूह) श्रेणी के छात्रों की दाखिला प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा निदेशालय ने 15 जून 2021 को जारी अपने आदेश में लगभग 2050 निजी स्कूलों की सूची जारी की। इन स्कूलों में कंप्यूटराइज्ड ड्रा के तहत तकरीबन 32500 ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी के छात्रों की नर्सरी, केजी और कक्षा एक में सीटें आवंटित की गई है। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने शिक्षा निदेशालय पर आरोप लगाते हुए कहा कि निदेशालय ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी के लगभग 5000 छात्रों को गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़वाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन 2050 निजी स्कूलों में सीटें आवंटित की गई हैं उसमें लगभग 300 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय से नर्सरी से आठवीं तक अस्थाई तौर पर मान्यता मिली हुई थी। लेकिन, ये मान्यता 30 सितंबर 2016 को समाप्त हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों को दो से तीन साल की अस्थाई मान्यता देती है। जिन स्कूलों ने 30 सितंबर 2016 को मान्यता समाप्त होने के बाद मान्यता के विस्तार के लिए आवेदन किया था उन सबकी मान्यता भी 31 मार्च 2021 को समाप्त हो चुकी है। इसलिए ये स्कूल गैर मान्यता प्राप्त है। निदेशालय इन स्कूलों में ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी के छात्रों को सीटें आवंटित कर अभिभावकों को धोखा दे रहा है। उन्होंने कहा कि निदेशालय या तो इन स्कूलों को स्थाई मान्यता दे या इन स्कूलों में सीटें आवंटित करना बंद करे।

वहीं, जब इस संबंध में कुछ स्कूलों से मान्यता के संबंध में बात करने की कोशिश की गई तो स्कूलों ने कहा कि उनकी मान्यता 31 मार्च 2021 को समाप्त हो गई है। मान्यता के विस्तार के लिए आवेदन किया हुआ है। लेकिन कोरोना काल के चलते मान्यता देरी से मिल रही हैं।

शिक्षा निदेशालय के शिक्षा निदेशक उदित प्रकाश राय ने कहा कि सभी स्कूलों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत मान्यता प्राप्त हैं। वहीं, निजी स्कूल शाखा के सहायक शिक्षा निदेशक योगेश पाल सिंह ने कहा कि कुछ स्कूलों को अनंतिम रूप से मान्यता प्राप्त हैं। इन स्कूलों में सीटें आवंटित की जा सकती हैं। कोरोना काल में स्कूलों का निरीक्षण न हो पाने से इनकी मान्यता का विस्तार नहीं हो पा रहा था। अब इस प्रक्रिया की भी तैयारी हो रही है।आज अगर अभिभावक अपने बच्चों को गैर मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ाने के बाद किसी दूसरे राज्य में दाखिला कराना चाहे तो नहीं करा सकते क्योंकि उन्हें मान्यता प्राप्त स्कूल का प्रमाण पत्र देना होता है। अभिभावकों को दाखिले के समय ये तक नहीं पता होता कि जिस स्कूल में वो अपने बच्चे का दाखिला करा रहे हैं वो मान्यता प्राप्त है भी या नहीं।

अपराजिता गौतम, अध्यक्ष, दिल्ली अभिभावक संघ

ये है नियम-

शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के अनुसार कोई भी विद्यालय बिना वैध मान्यता प्रमाणपत्र के संचालित नहीं किया जा सकता है।