अफगानिस्‍तान संकट पर विक्टिम कार्ड खेल रहा पाकिस्‍तान, जानें इमरान सरकार की रणनीति


अफगानिस्‍तान को लेकर पाकिस्तान की रणनीति होगी कि वह खुद को बेचारा घोषित करे...

ऐसे में जब अफगानिस्‍तान में तालिबान आतंकी हावी हो रहे हैं भविष्‍य में पाकिस्तान की रणनीति होगी कि वह खुद को बेचारा घोषित करे और दुनिया को दिखाए कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान हिंसा की आग में झुलस रहा है।

नई दिल्ली, आइएएनएस। ऐसे में जब अफगानिस्‍तान में तालिबान आतंकी हावी हो रहे हैं भविष्‍य में पाकिस्तान की रणनीति होगी कि वह खुद को बेचारा घोषित करे और दुनिया को दिखाए कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान हिंसा की आग में झुलस रहा है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार की रणनीति है कि वह इस मसले पर वैश्विक समुदाय से सहानुभूति हासिल करने की कोशिशें करे।

दरअसल पाकिस्‍तान पर एफएटीएफ की तलवार लटकी हुई है। पाकिस्‍तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से निकलने को बेचैन है। यही वजह है कि पाकिस्‍तान चाहता है कि वह खुद को एक सभ्‍य राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने प्रस्‍तुत करे जो दुनिया की सलामती चाहता है। सूत्रों का कहना है कि इस छल से पाक आर्थिक सहायता हासिल करने की कोशिशें करेगा और एफएटीएफ से बाहर निकलने की वकालत करेगा।

सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान का यह छल बड़े पैमाने पर मीडिया में नजर आएगा। आईएसआई के पास तालिबान के साथ अपने जुड़ाव को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट रूप से तैयार की गई योजना है। इसे अमली जामा पहनाने की कोशिशें होंगी। पाकिस्‍तान तालिबान की सफलताओं और अच्छे कार्यों के लिए श्रेय का दावा करेगा। साथ ही खामियों के लिए वैश्विक समुदाय से सहानुभूति हासिल करने की कोशिशें करेगा।इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान के एनएसए मोईद यूसुफ ने शुक्रवार को अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए इसे पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर करार दिया। यूसुफ का कहना है कि पाकिस्तान अमेरिका की वापसी के बाद बदलती स्थिति को लेकर बहुत चिंतित है। वह अफगानिस्तान में गृहयुद्ध से बुरी तरह प्रभावित होगा। उन्‍होंने यह भी कह दिया कि शांति के लिए अफगान सरकार को पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने होंगे।

मोईद यूसुफ ने कहा है कि अफगानिस्तान के हालात पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हैं। पाकिस्‍तान सरकार की इसी रणनीति के तहत हाल ही में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि अफगानिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति होने वाली है। ऐसे में पाकिस्तान शरणार्थियों के आगमन को नहीं संभाल पाएगा। पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि अफगानिस्तान में स्थिति बिगड़ती जा रही है जिसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है।