यूपी में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून में एक बच्चे की नीति से सहमत नही है विहिप, पुनर्विचार की मांग

 


प्रस्तावित जनसंख्या कानून में एक बच्चे की नीति पर हो पुनर्विचार: आलोक कुमार

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत करते हुए उसमें से एक बच्चे की नीति को हटाने का आग्रह किया है। विशेष तौर पर एक ही बच्चा होने पर सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को प्रोत्साहन की नीति पर विचार होना चाहिए।

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत करते हुए उसमें से एक बच्चे की नीति को हटाने का आग्रह किया है। राज्य विधि आयोग को भेजे सुझाव में विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और परिवार में दो बच्चों की नीति को प्रोत्साहन देने के प्रस्तावित कानून के उद्देश्य से परिषद सहमत है, लेकिन एक बच्चे के लिए प्रोत्साहन के प्रस्ताव से जनसंख्या में नाकारात्मक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

उनके अनुसार प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति पर विचार होना चाहिए। एक महिला के औसतन दो से कम बच्चों की नीति अपनाने से जनसंख्या को लेकर समय के साथ अंतर्विरोध पैदा होंगे। इस कारण कई तरह के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव होंगे। युवाओं और परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या का अनुपात गड़बड़ा जाएगा। एक बच्चे की नीति का अर्थ यह है कि एक समय पर परिवार में दो माता-पिता और बुजुर्ग पीढ़ी के चार सदस्यों की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ एक कामकाजी युवा के कंधों पर आ जाएगी।

 इसी तरह एक बच्चे की नीति से प्रदेश में अलग-अलग समुदायों के बीच जनसंख्या असंतुलन पैदा कर सकती है, क्योंकि परिवार नियोजन और गर्भ निरोध के उपायों को लेकर सबकी सोच अलग है। भारत के कई प्रदेशों में यह असंतुलन पहले से ही बढ़ रहा है। असम और केरल में यह खतरे के स्तर तक बढ़ गया है, जहां जनसंख्या की कुल वृद्ध दर घट गई है। इन दोनों प्रदेशों में हिंदू समुदाय में प्रजनन दर 2.1 से कम हो गई है। असम में मुस्लिम प्रजनन दर 3.16 और केरल में 2.33 हो गई है। इसलिए उत्तर प्रदेश को इस स्थिति में पहुंचने से बचना चाहिए। जनसंख्या नीति में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए, अन्यथा एक बच्चे की नीति उद्देश्य से भटका सकती है।

 आलोक कुमार ने कहा है कि चीन ने 1980 में एक बच्चे की नीति अपनाई थी। तकनीकी तौर पर इसे 1-2-4 की नीति कहते हैं। इसके दुष्परिणामों को दूर करने के लिए चीन को उन माता-पिता के लिए इस नीति में ढील देनी पड़ी, जो अपने माता-पिता के अकेले बच्चे थे। कहा जा सकता है कि चीन में एक बच्चे की नीति आधे से अधिक अभिभावकों पर कभी लागू नहीं हो सकी। तीन दशकों के अंदर इस नीति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।