भक्तों के बिना कल निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, अभेद्य सुरक्षा


भक्तों के बिना निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, अभेद्य सुरक्षा। फाइल फोटो

 12 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा इस साल भी बिना भक्तों के निकलेगी। प्रशासन द्वारा निर्धारित सेवक व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के अलावा किसी भी भक्त को रथयात्रा में शामिल होने की अनुमित नहीं दी गई है।

भुवनेश्वर/पुरी। जगन्नाथ धाम पुरी में 12 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाएगी। यह रथयात्रा पिछले साल की तरह इस साल भी बिना भक्तों के निकाली जानी है। प्रशासन द्वारा निर्धारित सेवक व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के अलावा किसी भी भक्त को रथयात्रा में शामिल होने की अनुमित नहीं दी गई है। ऐसे में एक दिन पहले से ही जगन्नाथ धाम को चारों तरफ से सील करते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। जल, थल व नभ हर जगह पर अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जगन्नाथ मंदिर के चारों तरफ की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रविवार प्रतिपदा तिथि में सुबह महाप्रभु की मंगल आरती, अवकाश पूजा, सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा नीति संपन्न करते हुए गोपाल बल्लभ भोग व सकाल धूप नीति संपन्न की गई।

इसके बाद महाप्रभु के तीनों पूजा पंडा सेवक तीन माला लेकर मंदिर के पटुआर (संकीर्तन दल) के साथ रथखला पहुंचे, यहां पर तैयार तीनों रथों के मुख्य महारणा (बढ़ेई) सेवक को अर्पित किए। उपरोक्त तमाम नीति संपन्न होने के पश्चात जगन्नाथ मंदिर के सामने रथखला में तैयार खड़े तीनों रथों को खींचकर सिंहद्वार के सामने लाया गया। सबसे पहले पहले भगवान जगन्नाथ जी का नंदीघोष रथ फिर देवी सुभद्रा का देव दलन रथ व अंत में बढ़े भाई बलभद्र के दर्पदलन रथ को खींचकर सिंहद्वार के सामने लाया गया। इसके बाद जगन्नाथ मंदिर में मध्याह्न धूप संपन्न की गई। तत्पश्चात पूजा पंडा सेवकों से मिले तीनों रथों के नीलचक्र को कोठसुआंसिया सेवकों के द्वारा रथ के ऊपर लगाया गया।  इसके पश्चात मंदिर में संध्या आरती, धूप तथा चंदन लागी व बड़सिंहार वेश संपन्न किया गया। तत्पश्चात चतुर्धा मूर्तियों को एक घंटा की पहुण नीति (प्रभु के विश्राम करने की नीति) संपन्न की गई। इसके बाद दइतापति सेवकों द्वारा सेनापटी लागी किया गया है।

रथयात्रा के लिए की गई है अभेद्य त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि में 12 जुलाई को निकाली जाने वाली विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के लिए अभेद्य त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जल, थल व नभ हर जगहों सुरक्षा बलों के जवान पैनी नजर रखेंगे। पुरी जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, रथयात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई खामी ना होने पाए, इसके लिए बड़दांड (रथयात्रा निकलने वाला मार्ग) को तीन सेक्टर में बांटा गया है। पूरे शहर को 12 जोन में विभक्त किया गया है। इसके लिए शहर में 65 प्लाटुन पुलिस बल, 10 अतिरिक्त एसपी, 31 डीएसपी तथा सहायक कमांडेंट, 222 एएसआइ और एसआइ, 64 आइआइसी आदि तैनात रहेंगे। समुद्र किनारे लाइफ गार्ड के जवान तैनात रहेंगे। शहर में विभिन्न जगहों पर 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सिंहद्वार से गुंडिचा मंदर तक मौजूद सभी छतों के ऊपर हथियार के साथ एक-एक सुरक्षा कर्मचारी तैनात रहकर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे।

रथयात्रा से पहले जगन्नाथ मंदिर में होंगे ये कार्यक्रम

जगन्नाथ मंदिर प्रशासन मिली जानकारी के मुताबिक, सुबह 4:30 मंदिर का दरवाजा खोला जाएगा और फिर मंगल आरती होगी। मंगल आरती संपन्न होने के बाद अवकाश नीति, इसके बाद द्वारपाल पूजा, सूर्य पूजा तत्पश्चात सकाल धुप में प्रभु को खिचड़ी भोग लगाया जाएगा।

मंत्रोच्चारण कर रथ प्रतिष्ठा नीति संपन्न करेंगे 24 पुरोहित

जगन्नाथ मंदिर में स्थित चाहाणी मंडप पर तीनों रथों के 24 पुरोहित रथ प्रतिष्ठा के लिए हवन करेंगे। हवन संपन्न होने के बाद तीनों रथों के आचार्य संपाति जल को लेकर जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की तरफ से आए पटुआर (संकीर्तन दल) के साथ तीनों रथों के ऊपर जाकर रथ प्रतिष्ठा नीति संपन्न करेंगे। तीनों रथों पर श्री विग्रहों के

स्थापित किए जाएंगे आयुध

बड़े भाई बलभद्र के रथ पर नृसिंह और उनके आयुध हल मूसल स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ताजा पुष्प को भगवान के बैठने वाले स्थान पर रखा जाएगा। इसके बाद भगवान जगन्नाथ के नदीघोष रथ, हनुमान व भगवान के आयुध शंख व चक्र स्थापित किए जाएंगे। भगवती मां सुभद्रा के रथ में भुवनेश्वरी के आयुध को स्थापित किया जाएगा। 24 ब्राह्मणों के द्वारा अभिमंत्रित जल को वेद मंत्र वाचन के साथ तीनों रथों पर छिड़काव किया जाएगा। यह कार्य खत्म होने के बाद रथ के महारणा सेवकों को फूल व ध्वजा दी जाएगी, जिसे महारणा सेवक नीलचक्र में लगाएंगे।

घंट-मृदंग के साथ चतुर्धा विग्रहों रथ पर किया जाएगा विराजमान

रथ प्रतिष्ठा नीति संपन्न होने के बाद मंदिर के भगवान की पहंडी बिजे के लिए डोरलागी पुष्पांजलि की जाएगी। तत्पश्चात सिंहारी सेवकों के द्वारा मदन मोहन व रामकृष्ण की प्रतिमूर्ति को घंट-मृदंग वाद्य के साथ रथ पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद भगवान के आयुध चक्रराज सुदर्श पहले पहंडी होकर आने के पश्चात, बड़े भाई बलभद्र, देवी सुभद्रा व अंत में भगवान जगन्नाथ को क्रमश: पहंडी में लाकर रथ पर विराजमान किया जाएगा।

स्वामी निश्चला नंद सरस्वती करेंगे रथारूण विग्रहों का दर्शन

पहंडी बिजे नीति संपन्न होने के बाद गोवर्धन मठ जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चला नंद सरस्वती अपने शिष्य व परिजनों के साथ तीनों रथ पर विराजमान चतुर्धा विग्रहों का दर्शन कर रथ पर परिक्रमा करेंगे।

राजकीय वंदन के साथ छेरापहंरा करेंगे गजपति 

इसके बाद गजपति महाराज दिव्यसिंह देव श्री नअर पालकी में विराजमान होकर रथ के पास पहुंचने के बाद सबसे बड़े भाई बलभद्र, महाप्रभु जगन्नाथ व फिर देवि सुभद्रा के रथ पर राजकीय वंदन करेंगे। इसके बाद तीनों रथों पर सोने के झाड़ू लगाएंगे यानी छेरा पहंरा नीति संपन्न करेंगे। गजपति के साथ उनके राजगुरु, उनके पुरोहित और उनके सगे-संबंधी रहेंगे। इसके बाद तीनों रथों को एक-एक कर सेवकों के द्वारा गुंडिचा मंदिर के लिए खींचा जाएगा।