बेसहारा पशुओं की बेलगाम समस्या, सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु भयानक हादसों का बनते है शिकार


सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु न केवल हादसों का कारण बनते हैं, बल्कि उनसे देश की छवि खराब होती है।

 पशुओं की बेलगाम समस्या देश भर में बेसहारा मवेशियों की कुल अनुमानित संख्या पांच लाख से भी अधिक है। इनमें अधिकांश गोवंश हैं। देश में गोवंश की संख्या के अनुपात में पर्याप्त गोशाला नहीं होना भी एक अलग समस्या है।

 देश के तमाम हिस्सों से आए दिन बेसहारा पशुओं के उत्पात के किस्से सामने आते रहते हैं। बात सिर्फ फसल नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कारण लोग हादसों के शिकार भी रहे हैं। उनके आतंक से देश के पर्यटन उद्योग पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। कुछ दिन पहले भारत घूमने आई एक जर्मन महिला को बेसहारा मवेशी ने घायल कर दिया। ऐसे मामले अंतहीन हैं।

स्पष्ट है कि ऐसे विदेशी पर्यटक अच्छी स्मृतियों के साथ स्वदेश नहीं लौटेंगे। इससे भारत में पर्यटन संबंधी गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। आंकड़े भी यही बताते हैं कि भारत में सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों की एक बहुत बड़ी वजह सड़कों पर घूमने वाले ये बेसहारा मवेशी हैं। ये यातायात व्यवस्था बाधित करने के साथ ही अचानक सड़क के बीच आकर चलते हुए वाहनों को अनियंत्रित करने और गिराने का काम करते हैं। स्थिति इन बेसहारा पशुओं की भी अच्छी नहीं है। वे भी गलियों और सड़कों के किनारे पसरे कूड़े-कचरे को निगलकर अपनी जान से हाथ धो रहे हैं।

देश भर में बेसहारा मवेशियों की कुल अनुमानित संख्या पांच लाख से भी अधिक है। इनमें अधिकांश गोवंश हैं। देश में गोवंश की संख्या के अनुपात में पर्याप्त गोशाला नहीं होना भी एक अलग समस्या है। दूसरा कारण यह है कि कुछ गोपालक गोवंश का दूध निकालने के बाद उन्हें ऐसे ही घूमने के लिए खुला छोड़ देते हैं। सच्चाई है कि जब तक गाय दूध देती है, तब तक वह मां मानी जाती है और जब दूध देना बंद कर देती है तो उसे या तो आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है या फिर कसाई के हाथों बेच दिया जाता है। यह भी एक विद्रूप है कि जहां हमारा देश विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है वहीं हम आज तक अपने बेसहारा पशुओं के लिए कोई उचित आसरा तक नहीं तलाश कर पाए हैं। दूसरे कई देशों में गाय तो छोड़िए कुत्ता भी आवारा घूमता हुआ नजर नहीं आएगा। इस मामले में अपने देश का हाल बहुत बेहाल है।

आवश्यकता है कि हम अपने देश में विकास की बुलेट ट्रेन दौड़ाने से पहले अपने बेसहारा मवेशियों से जुड़ी समस्या का समाधान करें। इसके लिए गोशालाओं की संख्या में वृद्धि कर बेसहारा घूमने वाले गोवंश पर नकेल कसनी होगी। बेसहारा मवेशियों के नियमन और निषेधन को लेकर स्थानीय प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी और अपने क्षेत्र में घूमने वाले बेसहारा मवेशियों के मालिकों का पता लगाकर उन्हें दंडित करना होगा ताकि वे दोबारा अपने पशुओं को खुला न छोड़ें। किसानों को चाहिए कि खेतों में घुसने वाले बेसहारा मवेशियों को पकड़कर उन्हें अपने खेतों में बांधकर रखें, असली मालिक स्वयं ही उन्हें ढूंढते हुए आ जाएगा। यदि वे फिर भी न आएं तो पशुओं को स्थानीय प्रशासन के हवाले कर दिया जाना चाहिए।