लुटियंस दिल्ली के एक पार्क में सब्जियां और फल उगाकर बच्चों को दी जा रही शिक्षा

 


अगली पीढ़ी को पर्यावरण और प्रकृति से रूबरू कराने के लिए आरडब्ल्यूए का अभिनव प्रयोग।

गेंहू और चावल राशन की दुकानों में पैदा नहीं होते न ही टमाटर लौकी धनिया और केला जैसे फल व सब्जियां ठेले पर उगती है। अगली पीढ़ी को यह बताने के लिए लुटियंस दिल्ली की एक आरडब्ल्यूए अभिनव प्रयोग कर रही है।

नई दिल्ली। गेंहू और चावल राशन की दुकानों में पैदा नहीं होते, न ही टमाटर, लौकी धनिया और केला जैसे फल व सब्जियां ठेले पर उगती है। अगली पीढ़ी को यह बताने के लिए लुटियंस दिल्ली की एक आरडब्ल्यूए अभिनव प्रयोग कर रही है। उसने कालोनी की पार्क में ही इनको उगाया है और इसके पैदा होने की प्रक्रिया से बच्चों को तसल्ली से परिचित करा रही है। आश्चर्य चकित बच्चें भी खेती की इस प्रक्रिया को ध्यान से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

यह मामला राष्ट्रपति भवन से थोड़ी दूर स्थित मंदिर मार्ग की है। यहां टाइप-तीन, सेक्टर-डी की कालोनी के छोटे से पार्क को आरडब्ल्यूए ने खेत में तब्दील कर दिया है। जिसमें कई तरह की सब्जियां और फल उगाई जा रही है तो औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं। इस कालोनी में रहने वाले लोग केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों में तैनात हैं। इनके बच्चों ने खेती-किसानी नहीं देखी है। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जगदीश तोमर कहते हैं कि यह देखकर दुख होता है कि अधिकांश बच्चों को फसलों, सब्जियों और फल के पैदा होने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं है।

वह यह नहीं जानते हैं कि इनके पैदा होने की पूरी प्रक्रिया क्या है। यहां तक की वह पौधा और पत्तियों में भी अंतर नहीं कर पाते हैं। यह स्थिति कई बार बड़े लोगों की भी होती है, क्योंकि शहरी जीवन में उन्हें खेती की प्रक्रिया से रूबरू होने का मौका नहीं मिला है। कोई डेढ़ साल पहले इस तरह की खेती का विचार आया। इसके लिए उन्होंने बकायदा खेती का प्रशिक्षण लिया, बीज दूसरे राज्यों से लाए। अब आरडब्ल्यूए का पार्क फसलों से लहलहा रही है। मौजूदा समय में मक्का, मिर्च, केला, तोरई व लौकी लगी है। मक्के की बालियां निकल आई है।

वह बताते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता था कि मक्का कहां निकलता है। मंदिर मार्ग स्थित विभिन्न कालोनियों के आरडब्ल्यूए संगठनों के फेडरेशन डीआइजेड के अध्यक्ष प्रीतम धारीवाल बताते हैं कि यह प्रयोग लोगों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। दूसरे कालोनियों के बच्चे भी अभिभावकों के साथ यह खेत देखने आ रहे हैं।

खेती के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल

इतना ही नहीं इस खेती में जैविक खाद का प्रयोग हो रहा है। इसके लिए कालोनी के पेड़-पौधों की पत्तियों को इकट्ठा किया जाता है तो घरों से निकले वाले खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है। इनको मिट्टी के नीचे दबाकर खाद बनाया जाता है। जिसका इस्तेमाल इस खेत के साथ कालोनी के लोग गमलों में लगाए गए पौधों के लिए करते हैं।

हर्बल गार्डन बढ़ा रहा आयुर्वेद पर ज्ञान

इस पार्क के एक कोने में हर्बल गार्डन भी बनाया गया है, जिसमें अजवाइन, एलोविरा, तुलसी, कढ़ी पत्ता व दर्दपात समेत अन्य औषधीय पौधे लगाए गए हैं। प्रीतम धारीवाल कहते हैं कि इस कोरोना काल ने औषधीय पौधों की अहमियत से परिचित कराया है। इस हर्बल गार्डन ने लोगों को काफी मदद पहुंचाई।