'कॉलर बॉम्ब जो ट्रेलर में दिख रही है, वो नहीं है... यही इसकी ब्यूटी है'- जिम्मी शेरगिल

 


Jimmy Sheirgill in Collar Bomb and During Interview. Photo- Instagram

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जिम्मी रंगबाज़ और योर ऑनर सीरीज़ के बाद डिज़्नी प्लस हॉटस्टार की फ़िल्म कॉलर बॉम्ब में एक पुलिस ऑफ़िसर की मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे। न्यानेश ज़ोटिंग निर्देशित कॉलर बॉम्ब थ्रिलर फ़िल्म है जो 9 जुलाई को प्लेटफॉर्म पर आएगी।

नई दिल्ली। 2021 में अपने करियर के 25 साल पूरे कर रहे जिम्मी शेरगिल ने कई बेहतरीन फ़िल्मों और किरदारों के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनायी है। रोमांटिक किरदारों से लेकर थ्रिलर फ़िल्मों तक में जिम्मी ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जिम्मी रंगबाज़ और योर ऑनर सीरीज़ के बाद डिज़्नी प्लस हॉटस्टार की फ़िल्म कॉलर बॉम्ब में एक पुलिस ऑफ़िसर की मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे। न्यानेश ज़ोटिंग निर्देशित कॉलर बॉम्ब थ्रिलर फ़िल्म है, जो 9 जुलाई को प्लेटफॉर्म पर आएगी। जिम्मी की जागरण डॉटकॉम से बातचीत के कुछ अंश। 

आपने काफ़ी थ्रिलर फ़िल्में की हैं। कॉलर बॉम्ब को चुनने के पीछे क्या ख़ास वजह रही?

कहीं ना कहीं कहानी सबसे ज़रूरी होती है। किस माहौल में सेट है। जो दुनिया आप लोगों को दिखाने जा रहे हैं, वो दुनिया क्या लोगों को दो घंटे या डेढ़ घंटे के लिए कुर्सी से बांधकर रखेगी, क्योंकि यह एक थ्रिलर है। जब यह सारी चीज़ें फिट बैठ जाती हैं तो मुझे लगता है कि यह एक अच्छी कहानी है। एक अच्छी थ्रिलर है।जब यंग लोग जुड़े होते हैं, जिन्होंने बहुत सारा सिनेमा देखा होता है और एक चाह होती है कि कुछ ऐसा बनाएं कि लोगों को थ्रिलर का मज़ा आए। जब आपके पहुंचती ऐसी कहानी पहुंचती है तो आप उसे पढ़ते हैं। आपको अच्छी लगती है। आपके डिस्कशंस होते हैं कि आप इसको कैसे करने की सोच रहे हैं। उस वक़्त आपका दिमाग़ सेट हो जाता है कि यह अच्छी थ्रिलर है। आप सही कह रहे हैं कि मैंने काफ़ी थ्रिलर की हैं। काफ़ी समय बाद एक नई थ्रिलर लेकर आ रहे हैं हम लोग। तो मैं उम्मीद करता हूं कि लोगों को पसंद आएगी।

ट्रेलर में आपका किरदार काफ़ी जटिल लग रहा है। किरदार की मानसकिता को समझने के लिए अलग से कुछ तैयारियां करनी पड़ीं?

जब राइटर ने, डायरेक्टर ने बहुत ज़्यादा डिटेल में काम कर रखा हो तो बतौर एक्टर आपका काम आसान हो जाता है। हम जैसे लोग या कलाकारों का फ़र्ज़ बनता है कि हम लोग सलाह दें। अगर वो सलाह पसंद आती है तो ठीक है। नहीं आती है तो उनका काउंटर क्या होता है। इस फ़िल्म के राइटर्स और डायरेक्टर्स इतने तैयार थे कि उनके जो काउंटर सजेशंस आते थे, वो इतने अच्छे होते थे कि आपको लगता था कि इन्होंने तो पूरी बैक स्टोरी को अपने दिमाग़ में बसा रखा है।बाक़ी यह एक और फ़िल्म है, उसमें एक किरदार किया है। पहले भी कई किरदार किये हैं। अपनी तरफ़ से कोशिश की है कि कुछ अलग तरीक़े से इस किरदार को पेश किया जाए। जैसा कि मैंने पहले कहा, सबसे अहम चीज़ कहानी होती है और वो कहानी अगर ऑडिएंस को जोड़ लेती है तो पूरी टीम के लिए सबसे बड़ी सफलता होती है।

ट्रेलर में एक संवाद आता है, मुहम्मद बिन तुगलक... इसका कहानी से किस प्रकार संबंध है? 

यह एक पिता और बेटे की रिलेशनशिप को दिखाता है। ड्राइव करते हुए उनकी बातचीत होती है। उस बातचीत का हिस्सा ट्रेलर में डाला गया है। एक लड़का जो यंग है, अभी स्कूल में है। उसकी सोच कैसी है। यह पुलिस वाला (जिम्मी का किरदार), जिसने काफ़ी ज़िंदगी देखी है। काफ़ी केस देखे हैं। उसकी रिलेशनशिप उसके बेटे के साथ कैसी है और उसका नज़रिया चीज़ों को लेकर क्या है?

मेरा बेटा कहता है कि वो इंडिया का राज़ा था, तो मेरा किरदार कहता है कि रिएलिटी यह है कि वो सिर्फ़ दिल्ली का सुल्तान था। बाप और बेटे की सोच में एक अंतर दिखाया गया है। फ़िल्म का संदेश है कि पास्ट कैन कम बैक टू हॉन्ट यू एनी टाइम (अतीत कभी पीछा नहीं छोड़ता)।

आपने माचिस से डेब्यू किया था, जो आतंकवाद के ख़िलाफ़ संदेश देती है। अब कॉलर बॉम्ब की कहानी भी आतंकवाद के विषय पर आधारित दिखती है। सिनेमा में विषय ज़्यादा नहीं बदले हैं?

अगर हम कहानी का बात करें तो इससे कहीं आगे जाकर बहुत गहरी बात कहती है। समझ लीजिए, मैं एक हिंट ही दे रहा हूं आपको। बस यही ब्यूटी इस फ़िल्म की है कि यह वो नहीं है, जो आप समझ रहे हैं। यह किसी और चीज़ के साथ डील करती है और वो चीज़ एक महौल है। वही एक चीज़ है, जो इस कहानी को दिलचस्प बनाती है। वही एक चीज़ है जो मुझे इस कहानी में अलग लगी थी।

आपने इतने किरदार निभाये हैं। किसी किरदार या कहानी को चुनते वक़्त आपकी क्या एप्रोच रहती है? 

आप अलग-अलग किरदार निभाते हैं। आप कोशिश यही करते हैं कि कितना नज़दीक आप उस किरदार के जा सकें, जो आपके लिए लिखा गया है। उतना ही आप उसे एंजॉय करेंगे और उतना ही दर्शक उसे एंजॉय करेंगे। कौन से किरदार मेरे क़रीब हैं, यह मेरे लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि जिन किरदारों में मेहनत करनी होती है, वही किरदार बाहर निकलकर आपके लिए कुछ अलग लेकर आते हैं।

कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जिनमें आपने बहुत अधिक मेहनत नहीं की होती। बस अपने निर्देशक को फॉलो किया होता है और यह समझा होता है कि यह किरदार बहुत अच्छा लिखा गया है, कहानी बहुत अच्छी लिखी हुई है। इसमें बहुत ज़्यादा घुसकर इसे ख़राब करने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ़ उतना ही कर दो, जितना लिखा गया है तो भी यह यादगार बन जाएगा। वो एक अहम बात होती है और उसी हिसाब से किरदारों को एप्रोच करते हैं। कुछ यादगार बन जाते हैं, कुछ साधारण रह जाते हैं। यही एक एक्टर की लाइफ़ है और सिनेमा का हिस्सा भी।

फ़िल्म की शूटिंग कब हुई? लॉकडाउन के दौरान हुई तो किसी तरह की दिक्कतें पेश आयीं?

इसकी शूटिंग पहले लॉकडाउन के बाद हुई थी। जब पहला लॉकडाउन हटा था और सब कुछ खुला था। उस वक़्त हमने अक्टूबर से दिसम्बर में इस फ़िल्म को शूट किया। लगभग पूरी फ़िल्म हिमाचल प्रदेश में हुई है, क्योंकि वहीं की कहानी है। बस एक स्कूल का हिस्सा है, जो हमें नैनीताल में जाकर शूट करना पड़ा, क्योंकि उस स्कूल की लोकेशन कहानी से ज़्यादा मिलती-जुलती थी।

मेरे लिए तो इसलिए स्पेशल है, क्योंकि लॉकडाउन के बाद यह पहली फ़िल्म थी, जिसकी मैंने शूटिंग की थी। आम तौर पर फ़िल्म की शूटिंग 30-35 दिन में पूरी हो जाती है और आप रैप करके वापस आ जाते हैं। लेकिन, जो सिचुएशन चल रही है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना था और आपको बबल में रहना था तो दो-सवा दो महीने हमें आउटडोर करने में लग गये थे। अगर सब कुछ खुला हो तो कई बार आप अतिरिक्त घंटे भी कर लेेते हैं। इसमें इसीलिए थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम हमें लगा था।

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आने से मनोरंजन इंडस्ट्री में किस तरह के बदलाव देखते हैं?

ओटीटी पर दिलचस्प कंटेंट बन रहा है। लोगों को घर पर बैठे हुए कुछ अलग देखने का मौक़ा मिल रहा है। उन्हें अलग-अलग कहानियां देखने को मिल रही हैं। रियलिस्टिक कहानियां, जिन्हें ख़ूबसूरती के साथ फ़िल्माया गया है, देखने को मिल रही हैं। जो डांस और गानों वाली कमर्शियल फ़िल्में सिनेमाघरों में देखने के आदी थे, अब उन्हें टाइम मिला तो घर बैठे हुए उन्हें कुछ रियलिस्टिक, थ्रिलिंग कहानियां भी देखने को मिलीं, जिनसे वो जुड़े। किसी भी प्लेटफॉर्म पर देखें, लेकिन उससे पता चलता है कि वो इस दुनिया (ओटीटी) का लुत्फ़ उठा रहे हैं, जिसका वो पहले अनुभव नहीं ले सके थे।

फ़िल्म में आशा नेगी के साथ काम कर रहे हैं। बतौर एक्ट्रेस किस तरह का अनुभव रहा?

आशा जी की जो पहले इमेज थी, मैं देखकर चौंक गया था कि किरदार के इतना अंदर घुसती हैं। वो उस किरदार के अंदर ही रहती थीं। हर समय यूनिफॉर्म में। ऐसा लगता था कि यह वहीं की कोई पुलिस ऑफ़िसर हैं, जो एक अजीब से वक़्त से गुज़र रही है। अच्छा लगता है, जब आप ऐसे डेडिकेटेड एक्टर्स को देखते हैं। कमाल का फरफॉर्मेंस दिया है। एक अलग और ज़बरदस्त किरदार में नज़र आएंगी।

आप निर्माता भी बन चुके हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए किसी प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहे हैं?

कुछ प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। फिर यह पैनडेमिक आ गया। चीज़ें बहुत अनिश्चित हो गयीं। हम सब उम्मीद यही करते हैं कि जितनी जल्दी हो सके, यह सिचुएशन ठीक हो जाए। दुनिया खुल जाए। सब ठीक हो जाए। फिर हम वापस उन चीज़ों पर काम करना शुरू करें। निश्चित रूप से कुछ दिलचस्प प्रोजेक्ट्स आएंगे।