दो से अधिक बच्‍चे वाले नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, पंचायती राज मंत्री ने कही यह बड़ी बात


पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी व सीएम नीतीश कुमार। फाइल फोटो

बिहार के नगर निकायों में दो से अधिक बच्‍चे वाले चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसी व्‍यवस्‍था सीएम नीतीश कुमार ने की है। अब जरूरत है कि पंचायतों में भी इसे लागू किया जाए। ये बातें पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कही है।

पटना, आनलाइन डेस्‍क। जनसंख्‍या नियंत्रण कानून पर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार CM Nitish Kumar) के बयान के बाद सियासत गर्म है। उनके ही दल के बड़े नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कानून का समर्थन किया है। अब पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी  ने संकेत दिए हैं कि बिहार में नगर निकायों की तरह पंचायतों में भी दो से अधिक बच्‍चे वाले चुनाव लड़ने से वंचित किए जा सकते हैं। इसको लेकर तैयारी चल रही है। उन्‍होंने यूपी के कानून की सराहना की। यह भी कहा कि बिहार में तो यह पहले से ही लागू है।     

नगर निकाय में सीएम ने ही की थी व्‍यवस्‍था 

मंत्री ने कहा किदेश में जनसंख्‍या नियंत्रण कानून बहुत जरूरी है। जहां पढ़े लिखे लोग होते हैं वहां प्रजनन दौर स्‍वाभाविक तौर पर कम है। आजादी के बाद देश अब 75 वर्ष का होने जा रहा है। उससे पहले यह सब व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।  आज के समय में यह कानून बहुत जरूरी है। मुख्‍यमंत्री के बयान की बाबत मंत्री ने कहा कि बिहार में तो यह पहले से लागू है। हमारे सीएम तो तो बिहार में पहले ही एक तरह से जनसंख्‍या नियंत्रण की व्‍यवस्‍था लागू कर चुके हैं। उन्‍होंने ही नगर निकाय में दो से ज्‍यादा बच्‍चों वाले के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। बिहार के बाद दूसरे राज्‍यों ने इसका अनुसरण किया। अब समय आ गया है कि इसे पंचायतों में भी लागू किया जाए। क्‍योंकि उस समय लगा था कि पंचायतों में अभी शिक्षा दर बढ़ाने की जरूरत है। बता दें कि पंचायत व ग्राम कचहरियों के चुनाव में दो या उससे अधिक बच्चे वालों को अयोग्य घोषित करने का मसौदा तैयार हो रहा है। उसमें कहा गया है कि यह प्र‍विधान 2021 के चुनाव में लागू नहीं होगा।  

मुख्‍यमंत्री ने महिला शिक्षा की बताई जरूरत 

गौरतलब है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने यूपी में कानून बनाए जाने पर कहा था कि सिर्फ कानून बना देने से कुछ नहीं होगा। जब तक महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी, आबादी को लेकर कितने भी कानून बना देने से प्रभावी नहीं होगा। लोगों की जागरूकता से ही इस पर लगाम लगाना संभव है। महिलाएं पढ़ी-लिखी होंगी तो प्रजनन दर में कमी आएगी।