भाजपा नेता दलितों व महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को लेकर गहलोत सरकार पर साध रहे निशाना

 


भाजपा नेता दलितों व महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को लेकर गहलोत सरकार पर साध रहे निशाना। फाइल फोटो

 भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट कर कहा कि लोक देवताओं की जिस भूमि के शूरवीरों ने नारी की रक्षा के लिए अनेक बार अपने प्राणों की आहूति दी। वहीं प्रदेश आज महिलाओं पर अत्याचार दुष्कर्म और हिंसा में सिरमौर हो गया।

 संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में भाजपा कानून व्यवस्था, दलितों पर अत्याचार और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साध रही है। रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट कर कहा कि लोक देवताओं की जिस भूमि के शूरवीरों ने नारी की रक्षा के लिए अनेक बार अपने प्राणों की आहूति दी। वहीं, प्रदेश आज महिलाओं पर अत्याचार, दुष्कर्म और हिंसा में सिरमौर हो गया। बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु शर्मा ने दलित अत्याचार के खिलाफ आंदोलन चलाने की घोषणा की। इससे पहले शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राज्य में दुष्कर्म, दलितों पर अत्याचार के आंकड़े गिनाते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया था।

भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए रविवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि की बात भ्रामक है। राज्य में साल, 2020 में महिला अत्याचारों में 16 व दुष्कर्म की घटनाओं में 11 फीसद की कमी आई है। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में इस साल जून माह तक नौ फीसद की कमी आई है। हालांकि दुष्कर्म के प्रकरणों में साल, 2019 के मुकाबले 0.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के प्रकरणों में साल 2017-18 में करीब 33 फीसद महिलाओं को अपनी एफआइआर दर्ज करवाने के लिए कोर्ट तक जाना पड़ता था।

दुष्कर्म के 42 फीसद मामले प्रमाणित नहीं होते

लाठर ने कहा कि पुलिस थानों में अपराधों का आवश्यक पंजीकरण की नीति तय करने के बाद एफआइआर दर्ज होने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसी अनुपात में पुलिस ने मामलों का निपटारा भी किया है। अपराधियों को कानून से सजा भी दिलवाई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अनुसंधान के आधार पर पाया कि दुष्कर्म के करीब 42 फीसद प्रकरणों में आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच यूनिट बनाई गई है। इसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को तैनात किया गया है।

यह यूनिट अनुसूचित जाति, जनजाति और मानव तस्करी जैसे अपराधों की रोकथाम का काम भी करेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पुलिस थानों में सुरक्षा सखी नाम से एक नई योजना शुरू की गई है। इसके तहत स्थानीय महिलाओं को जोड़कर महिलाओं से संबंधित समस्याओं का निराकरण करने प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झालारापाटन के कृष्णा वाल्मीकि हत्या के मामले में घटना कुछ देर बाद ही छह आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक आरोपित की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व एक संसदीय समिति के सदस्यों ने राज्य पुलिस के कामकाज की सराहना की थी।