देश में जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

 


सुप्रीम कोर्ट से देश में जनसंख्या विस्फोट रोकने की गुहार।(फोटो: दैनिक जागरण)
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि देश में ज्यादातर समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट है। केंद्र ने स्पष्ट रूप से लोगों को परिवार नियोजन के लिए मजबूर करने और बच्चों की एक निश्चित संख्या तय करने के लिए किसी तरह की जबरदस्ती का विरोध किया।

नई दिल्ली, एजेंसी। देश में जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। देश की 50 फीसदी समस्याओं के लिए जनसंख्या विस्फोट को जिम्मेदार बताते हुए इसे रोकने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। इस पर आज सुनवाई होगी। यह याचिका फिरोज बख्त अहमद ने दायर की है। इस याचिका में शीर्ष अदालत से सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए नियम और दिशानिर्देश बनाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। इसमें सरकारी नौकरियों और सुविधाओं एवं वोट देने और चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चे की नीति को लागू करने का अनुरोध किया गया है।

देश में ज्यादातर समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट है, लेकिन केंद्र ने इस खतरे को रोकने के लिए आज तक कोई सख्त कानून बनाने की दिशा में उचित कदम नहीं उठाया है। यह दलील सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार के जवाब के प्रत्युत्तर में दाखिल याचिका में दी गई। याचिका में कहा गया कि जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन संविधान में सातवीं अनुसूची (20ए) की लिस्ट-3 का हिस्सा है। इसके चलते केंद्र जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून व नियम बना सकता है। लेकिन आज की तारीख तक कठोर कानून बनाने के लिए कोई भी उचित कदम नहीं उठाया गया है।

एक जनहित याचिका पर केंद्र के जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि केंद्र ने अपनी जनता पर परिवार नियोजन थोपने का तथा निश्चित संख्या में संतान रखने के लिए कोई दबाव बनाने का स्पष्ट रूप से विरोध किया है क्योंकि इससे जनसांख्यिकी विरूपण हो सकता है। उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी है जिसमें देश की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए दो संतान रखने के नियम समेत कुछ कदम उठाने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज कर दिया गया।

वकील अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 10 दिसंबर, 2020 को एक लिखित उत्तर में कहा था कि केंद्र सरकार परियोजना नियोजन को थोपने के खिलाफ है तथा कोई दबाव वाली कार्रवाई नहीं करेगी। उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा कि जनसंख्या विस्फोट अनेक क्षेत्रों में देश की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग की दयनीय स्थिति की भी मूल वजह है।