तिरुपति मंदिर में भक्त ने चढाई पांच किलो की सोने की तलवार, एक करोड़ रुपये है लागत


दो किलो सोने और तीन किलो चांदी से तैयार की गई 'सूर्य कटारी'

बिजनेसमैन ने रंगनायकुला मंडपम में मंदिर परिसर के अंदर एक अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी एवी धर्म रेड्डी को अपना प्रसाद सौंपा। टीटीडी अधिकारियों के अनुसार तलवार का वजन पांच किलो है जो दो किलो सोने और तीन किलो चांदी से तैयार की गई है।

हैदराबाद, आइएएनएस। आंध्र प्रदेश का तिरुपति मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यहां भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को करोडों रुपये का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। हैदराबाद के एक बिजनेसमैन ने सोमवार को भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के मंदिर में एक करोड़ की लागत से तैयार सोने की तलवार 'सूर्य कटारी' भेंट की। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के एक अधिकारी ने बताया, 'हैदराबाद के व्यवसायी एमएस प्रसाद ने तिरुमाला में वेंकटेश्वर स्वामी को एक सूर्य कटारी (तलवार) भेंट की है।' उन्होंने रंगनायकुला मंडपम में मंदिर परिसर के अंदर एक अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी एवी धर्म रेड्डी को अपना प्रसाद सौंपा। टीटीडी अधिकारियों के अनुसार, तलवार का वजन पांच किलो है जो दो किलो सोने और तीन किलो चांदी से तैयार की गई है।

श्री वेंकटेश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित तिरुमाला की पहाड़ियों पर बना है। यह एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। कई शताब्दी पहले यह मंदिर बनाया गया था जो वास्तुकला और शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण है। बताया जाता है कि होयसल और विजयनगर के राजाओं का आर्थिक रूप से मंदिर के निर्माण में अहम योगदान रहा है।

जम्मू में 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा तिरुपति श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर

जम्मू में भगवान वेंकटेश्वर मंदिर निर्माण शुरू हो चुका है। इससे हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय भी काफी खुश है। यह मंदिर सिदड़ा के मजीन में होगा। पिछले महीने मंदिर के लिए भूमि पूजन हो चुका है और इसे सिर्फ 18 महीनों में बनाकर तैयार कर लिया जाएगा।

भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर के निर्माण के लिए मजीन गांव में 25 हेक्टेयर (करीब 62 एकड़) जमीन अलाट की गई है। यह भूमि 40 साल की लीज पर दी गई है। इस भूमि पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मंदिर, वेद पाठशाला, अध्यात्म केंद्र, आवासीय सुविधा और पार्किंग का निर्माण करेगा। वहीं, आने वाले दिनों में यहां पर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं भी बनाने का प्रस्ताव है। टीटीडी वैदिक स्कूल और अस्तपाल के साथ दो वर्षों में मंदिर निर्माण करेगा।