ग्रामीणों का आरोप- नशे में रहते हैं ज्यादातर प्रदर्शनकारी, घोड़े पर बैठकर गांवों करते हैं हुड़दंग

 


सिंघु गांव के लोगों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी

 सिंघु सिंघोला अलीपुर बख्तावर समेत सिंघु बार्डर के आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि ज्यादातर प्रदर्शनकारी नशे में रहते हैं। वह कई बार घोड़े लेकर गांवों में चले आते हैं और हुड़दंग करते हैं।

नई दिल्ली,  संवाददाता। सात महीने से ज्यादा समय से परेशानियां झेल रहे दिल्ली के गांवों के लोग सिंघु बार्डर पर रास्ता खुलवाने को एकजुट हैं। इन लोगों ने 21 जुलाई को प्रस्तावित मार्च का समर्थन किया है। गांव के लोगों का कहना है कि कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठे होने से सारा यातायात गांवों से होकर गुजर रहा है। इससे गांवों के लोगों का जीवन नारकीय होता जा रहा है। वहीं पेट्रोल पंप कर्मियों, फैक्ट्री कर्मियों व सिंघोला गांव की मार्बल फैक्ट्री से जुड़े लोग भी रास्ता खुलवाने की मांग सरकार से कर रहे हैं। अलग-अलग संगठनों का कहना है कि अगर प्रदर्शन ही करना है तो बुराड़ी के पास खाली पड़े मैदान में जाकर करें। यहां उनका व्यापार, खेती, जनजीवन आदि प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने पार की सारें हदें

सिंघु, सिंघोला, अलीपुर, बख्तावर समेत सिंघु बार्डर के आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि प्रदर्शनकारी कई बार गांव के लोगों पर हथियारों से हमला कर चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार ज्यादातर प्रदर्शनकारी नशे में रहते हैं। वह कई बार घोड़े लेकर गांवों में चले आते हैं और हुड़दंग करते हैं। उनके पास तलवार, भाले, फरसे आदि होते हैं। इसलिए वह परिवार व बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

काम धंधे हुए ठप

सिंघोला मार्बल एसोसिएशन के प्रधान गोपाल अग्रवाल ने कहा कि दो वर्ष से काम-धंधा पूरी तरह से ठप है। पहले कोरोना की वजह से काम बंद रहा और उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना शुरू कर दिया। रास्ता बंद होने की वजह से ट्रकों का भाड़ा पांच गुना बढ़ गया है। हरियाणा के सोनीपत तक जाने में पहले दस मिनट लगते थे और अब दो घंटे लग जा रहे हैं। काम न होने की वजह से कामगार वापस जा रहे हैं। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा गया है। हमारे यहां से भारी संख्या में लोग मार्च में शामिल होंगे।

सिंघु गांव के लोगों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी

कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों की वजह से सिंघु गांव के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ रही है, क्योंकि इस गांव से होकर ही लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और यहीं से हरियाणा, पंजाब आदि के लिए लोग जा रहे हैं। गांव के किसानों का कहना है कि दिन में तीन बार खेतों में जाना पड़ रहा है। वाहनों की वजह से जाम इतना भयंकर लगता है कि एक से डेढ़ घंटे किसानों को खुद के गांव में ही फंसा रहना पड़ता है। इससे तीन गुना पेट्रोल-डीजल रोज बर्बाद हो रहा है। बता दें कि गांव की संकरी गलियों से बड़े-बड़े वाहन गुजर रहे हैं।