सेवा करने की जगह 'रियल एस्टेट उद्योग' बन गए हैं अस्पताल : सुप्रीम कोर्ट

 


सेवा करने की जगह 'रियल एस्टेट उद्योग' बन गए हैं अस्पताल : सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने आवासीय कालोनियों में संचालित छोटे नर्सिग होम को बंद करने की दी सलाह। अदालत ने अस्पताल भवनों में नियमों के अनुरूप सुधार करने की तिथि अगले साल जुलाई तक बढ़ाने पर नाराजगी जताते हुए गुजरात सरकार की खिंचाई की।

नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों की मौजूदा भूमिका को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। उसने कहा कि कोविड-19 महामारी के इस दौर में अस्पतालों को मानवता की सेवा करनी चाहिए, लेकिन इसकी जगह वे बड़े रियल एस्टेट उद्योग की तरह हो गए हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि आवासीय कालोनियों में दो-तीन कमरे के फ्लैट में चलने वाले नर्सिग होम को बंद कर देना चाहिए जो अग्नि व भवन सुरक्षा नियमों पर बहुत कम ध्यान देते हैं।

गुजरात सरकार की खिंचाई :

अदालत ने अस्पताल भवनों में नियमों के अनुरूप सुधार करने की तिथि अगले साल जुलाई तक बढ़ाने पर नाराजगी जताते हुए गुजरात सरकार की खिंचाई की। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, 'आपदा के इस दौर में मानवता की सेवा करने की जगह ये अस्पताल बड़े रियल एस्टेट उद्योग की तरह हो गए हैं। आप (गुजरात सरकार) अस्पताल भवनों में सुधार के लिए तय सीमा को बढ़ा देते हैं। पिछले साल 18 दिसंबर को दिए गए हमारे आदेश के मद्देनजर ऐसा नहीं किया जा सकता। अस्पतालों का निर्माण आपदा के समय मरीजों को राहत देने के लिए किया गया है, लेकिन वे पैसा बनाने की मशीन की तरह हो गए हैं।'

सरकार उपलब्ध कराए बुनियादी ढांचा :

महाराष्ट्र के नासिक में पिछले साल हुए एक हादसे में कुछ नर्स व मरीजों के मारे जाने की घटना का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, 'बेहतर होगा कि आवासीय कालोनियों के दो-तीन कमरों में संचालित नर्सिग होम या अस्पतालों को बंद कर दिया जाए। सरकार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। यह एक मानव त्रासदी है।'

हफ्ते भर में देना होगा स्पष्टीकरण :

शीर्ष अदालत ने इशारा किया कि गुजरात सरकार को अधिसूचना वापस लेनी होगी। उसने अधिसूचना जारी किए जाने के संबंध में एक हफ्ते के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। कोर्ट ने कहा, 'एक बार शीर्ष अदालत की तरफ से आदेश जारी होने के बाद उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता और आपने (गुजरात सरकार) पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिया कि अस्पतालों को जुलाई 2022 तक सुधार करने की जरूरत नहीं है।' अदालत कोविड मरीजों के इलाज के संबंध में लिए गए स्वत: संज्ञान के मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद करेगी।

कोविड अस्पतालों के फायर आडिट का दिया था आदेश :

पिछले साल 18 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को प्रत्येक जिले में कोविड अस्पातलों के फायर (आग) आडिट के लिए एक समिति गठित करने को कहा था। समिति को इन अस्पतालों का महीने में कम से कम एक बार फायर आडिट करना था और कोई कमी पाए जाने पर चिकित्सा संस्थानों के प्रबंधन को सूचित करते हुए राज्य सरकारों को रिपोर्ट सौंपनी थी, ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन कोविड अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है वे तत्काल इसके लिए आवेदन करें। उसने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड अस्पतालों में नोडल अधिकारी की नियुक्ति का निर्देश दिया था जो अग्नि सुरक्षा उपायों के अनुपालन के लिए जिम्मेदार होगा। शीर्ष अदालत ने गुजरात के राजकोट स्थित कोविड अस्पताल में हुए अग्निकांड का संज्ञान लिया था, जिसमें पांच मरीजों की मौत हो गई थी।