क्या गर्भवती महिलाओं को लगवाना चाहिए कोरोना की वैक्सीन?, पढ़िए महिला डॉक्टरों की राय

 


36वें सप्ताह से पहले लगवा लें टीका

 सफदरजंग अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डा. शीबा मारवाह ने कहा कि संभव हो तो दोनों डोज टीका गर्भावस्था के 36वें सप्ताह से पहले ले लेना चाहिए। क्योंकि सामान्य तौर 36 सप्ताह के बाद बच्चे को संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।

नई दिल्ली । कोरोना से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को टीका लगने लगा है। हालांकि, अभी टीके के प्रति उनमें हिचकिचाहट है। इसलिए टीका लगवाने से पहले गर्भवती महिलाएं डाक्टरों से संपर्क कर रही हैं। गायनेकोलॉजी की विशेषज्ञ डाक्टर कहती हैं कि शनिवार को पहले दिन बहुत कम गर्भवती महिलाओं ने टीका लिया लेकिन कोरोना से बचाव के लिए टीका लगवाना जरूरी है। क्योंकि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में गर्भवती महिलाएं अधिक प्रभावित हुए हैं और मौतें भी ज्यादा हुई है।

मणिपाल अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डा. योगिता पराशर ने कहा कि गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य व बच्चे पर टीके के दुष्प्रभाव को लेकर सवाल पूछ रही हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि दूसरी लहर में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा है।

 टीका लगाने पर तात्कालिक रूप से कोई परेशानी नहीं है। नौ माह के गर्भावस्था में कभी भी टीका लिया जा सकता है। आकाश अस्पताल के अनुसार शनिवार को पांच से भी कम गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हुआ। अस्पताल के गायनी विभाग की विशेषज्ञ डा. शिल्पा घोष ने महिलाएं सोच रही है कि तीसरी लहर आएगी या नहीं आएगी। कई देशों में संक्रमण बढ़ रहा है। अमेरिका में 90 हजार गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के बाद अध्ययन में यह देखा गया है कि टीका सुरक्षित है। इसके बाद इंग्लैंड में गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण शुरू हुआ। वहां भी कोई परेशानी नहीं देखी गई। कोई भी टीका जीवित वायरस से नहीं बना। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। गर्भावस्था में टिटनेस, टीडैप (टिटनेस, काली खांसी व डिप्थीरिया) व फ्लू के टीके पहले से दिए जाते हैं।

36वें सप्ताह से पहले लगवा लें टीका

सफदरजंग अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डा. शीबा मारवाह ने कहा कि संभव हो तो दोनों डोज टीका गर्भावस्था के 36वें सप्ताह से पहले ले लेना चाहिए। क्योंकि सामान्य तौर 36 सप्ताह के बाद बच्चे को संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए अलग व्यवस्था होगी। टीका देने के बाद दुष्प्रभाव की निगरानी के लिए भी अगल व्यवस्था होगी। साथ ही दुष्प्रभाव की जांच के लिए गठित कमेटी में गायनेकोलॉजी व पीडियाट्रिक के डाक्टरों को भी शामिल किया गया है।

एससीआइ हेल्थकेयर की निदेशक डा. शिवानी सचदेव गौर ने कहा कि शनिवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण शुरू हुआ। इसको लेकर अभी जानकारी का बहुत अभाव है। कुछ महिलाओं ने बताया कि टीकाकरण केंद्रों पर उन्हें टीका लगाने से मना भी कर दिया गया। क्योंकि सरकार का दिशा निर्देश टीकाकरण केंद्रों पर नहीं पहुंच पाया है।