सावन का हसीन तोहफा है हरियाणवी फिरनी, यूरोप तक हैं इसके स्‍वाद के कद्रदान


फतेहपुर- पूंडरी में तैयार की जा रही फिरनी।

सावन का हसीन तोहफे के नाम से मशहूर हरियाणा के फतेहपुर पूंडरी की फिरनी। विदेशों से फिरनी के लिए ऑर्डर आते हैं। इस ऑर्डर को पूरे करने के लिए 100 जगहों पर 125 क्विंटल फिरनी प्रतिदिन तैयार होती है।

कैथल, संवाददाता। फिरनी। हरियाणा की स्‍वादिष्‍ट फिरनी। इसके स्‍वाद के कद्रदान यूरोप तक हैं। इसे सावन का मशहूर तोहफा भी कहा जाता है। 100 जगहों पर 125 क्विंटल फिरनी प्रतिदिन तैयार की जा रही है। फतेहपुर-पूंडरी में सावन के हसीन तोहफे के नाम से मशहूर फिरनी बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। पूंडरी-फतेहपुर में भारी तादाद में बनने वाली फिरनी प्रदेश में ही नहीं विदेशों में भी अपनी महक फैला रही है। कोरियर व अन्य दूसरे माध्यमों से फिरनी के शौकीन अपने रिश्तेदारों के माध्यम से सीजन के दौरान काफी फिरनी मंगवाते है।

दिन रात जुटे कारीगर

दिन-रात एक करके भी फिरनी के काम में जुटे कारीगर फिरनी की डिमांड को पूरा नहीं कर पाते। मैदा, घी और चीनी के मिश्रण से तैयार होने वाली इस लाजवाब मिठाई के हर वर्ग के लोग कायल है। तभी तो सावन का महीना आते ही पूंडरी की फिरनी की मांग प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आनी शुरू हो जाती है।

दो से ढ़ाई महीने तक सीजन

पूंडरी के हलवाई पवन ने बताया कि बताया कि दो-ढ़ाई महीने चलने वाले इस फिरनी के सीजन में वे दिन-रात काम करके भी आर्डर पूरा नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि फिरनी का मिश्रण तैयार करने से लेकर इसे बनाने की प्रक्रिया बड़े ध्यान से की जाती है, तभी फिरनी की सही मिठास और स्वाद मिल पाता है। उन्होंने कहा कि फिरनी का स्वाद क्या बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मिलकर उठाते है।

यहां से आते ज्‍यादा ऑर्डर

फतेहपुर पूंडरी की फिरनी अमेरीका, कनाडा, इग्लैंड, थाइलैंड देशों तक मशहूर है। इस फिरनी की जब कोई रिलेटिव आता है। उसको फोन कर फिरनी मंगवाई जाती है। विदेश में जो फिरनी जाती है वे कम मीठी की जाती है। ताकि खराब न हो। कैथल से हर सीजन में 400 क्विंटल फिरनी जाती है।

100 जगहों पर 125 क्विंटल फिरनी प्रतिदिन तैयार होती है

हलवाइयों द्वारा 80 जगहों पर 125 क्विंटल फिरनी प्रतिदिन तैयार की जा रही है। जिसमें से अधिकतर फिरनी रोजाना बिक जाती है। जींद, कुरुक्षेत्र, रोहतक, पानीपत, अंबाला सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से थोक व्यापारी आ रहे हैं। फतेहपुर गांव से दिवंगत हरिकिशन व्यास द्वारा पूंडरी में 1936 से फिरनी बनाने का काम शुरू किया गया था। 85 साल का पूंडरी फिरनी का सफर हो गया है। ग्रामीण बताते है कि फतेहपुर गांव की छोटी सी दुकान से फिरनी बनने लगी थी। जिसकी आज के समय में पूरे देश में मांग है। उस समय के अंग्रेज अधिकारी भी गांव से फिरनी लेकर जाते थे। सीजन में हर घर में मेहमानों के लिए फिरनी रखी रहती है।

ये है खासियत, इसलिए रहता है अच्छा स्वाद

हलवाइयों का कहना है कि पूंडरी एक ऐसा क्षेत्र है। जिसके पानी में शोरा नहीं होता इसलिए फिरनी का स्वाद अच्छा होता है। पूंडरी क्षेत्र के 4.5 किलोमीटर दायरे के बाहर पानी में शोरे की मात्रा होने के कारण फिरनी का स्वाद लजीज नहीं बन पाता। यही कारण है कि पूंडरी में बनाई गई फिरनी पूरे भारत ही नहीं विदेशों में भी मशहूर है। पूंडरी के हलवाइयों द्वारा बनाई गई फिरनी एक महीने तक खराब नहीं होती। क्षेत्र व आसपास के जिलों से बाहर विदेशों में गए लोग भी फिरनी ले जाना और भेजना नहीं भूलते हैं।

फीकी फिरनी भी करवाई जाती है तैयार

हलवाइयों का कहना है कि फीकी फिरनी को भी काफी डिमांड आती है। शुगर के मरीजों द्वारा फीकी फिरनी तैयार करवाई जाती है। डा. प्रदीप का कहना है कि फीकी फिरनी से किसी शुगर के मरीज को दिक्कत नहीं है। सेवन कर सकते है।

विदेशों में ऐसे जाती है फिरनी

हलवाई संदीप ने बताया कि विदेशों से भी फिरनी की डिमांड आती है। जो भारतीय इन दिनों विदेश में जाते हैं तो उनसे फिरनी विशेष तौर पर मंगवाई जाती है। लेकिन इस वर्ष विदेशों से कम डिमांड आ रही है।

ऐसे बनती है फिरनी

फिरनी तैयार करने के लिए आटा को हाथों से तैयार किया जाता है। एक- एक पीस को हाथों से गोल बनाया जाता है। उसके बाद उसे घी में छोड़ दिया जाता है और बाद में उस पर मीठा चढ़ाया जाता है। एक दिन पहले फिरनी तैयार की जाती है। दूसरे दिन फिरनी खाने योग्य बनती है।