एनजीटी ने कहा- व्यावसायिक प्रयोग में आरओ से पानी की भारी बर्बादी को रोकें

 


आरओ से पानी की भारी बर्बादी को रोकें।(फोटो: दैनिक जागरण)

एनजीटी ने पर्यावरण और वन मंत्रालय (एमओइएफ) को उन क्षेत्रों में आरओ प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिना विलंब अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया जहां पानी में कुल घुलित ठोस (टीडीएस) का स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। नेशनल ग्रीन ट्रिब्य़ूनल (एनजीटी) ने कहा है कि केवल सार्वजनिक हित की कीमत पर कंपनियों के व्यावसायिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए आरओ प्यूरीफायर के इस्तेमाल में पानी की भारी बर्बादी को रोकने की जरूरत है। एनजीटी ने पर्यावरण और वन मंत्रालय (एमओइएफ) को उन क्षेत्रों में आरओ प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिना विलंब अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया जहां पानी में कुल घुलित ठोस (टीडीएस) का स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है।

एनजीटी ने कहा कि यह उम्मीद नहीं थी कि एमओईएफ को इस मामले को अंतिम रूप देने और बार-बार स्थगन और विस्तार की मांग करने में वर्षो लगेंगे जो कानून के शासन के खिलाफ है।यह ध्यान देने की बात है कि आरओ (उपचार) की आवश्यकता भूजल में पाए जाने वाले कुल घुलित ठोस (टीडीएस) को अलग करने में होता है। आरओ के उपयोग में पानी की बर्बादी को एनजीटी ने अस्वीकार्य बताया है।

हरित पैनल ने कहा कि केवल व्यावसायिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए बेशकीमती पानी बर्बाद किया जा रहा है। इस प्रवृत्ति को रोका जाना चाहिए। इस काम में मंत्रालय की ओर से जितनी देरी होगी इसे रोकने का उद्देश्य उतना ही प्रभावित होगा। यह पर्यावरण के हित के खिलाफ कार्य के बराबर है। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अगली तारीख से पहले सकारात्मक रूप से आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मांगी अटार्नी जनरल की मदद

सुप्रीम कोर्ट ने बिजली अधिनियम के एक प्रविधान को लेकर सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल की मदद मांगी है। दिसंबर 2019 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के आधार पर एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी। इस व्यक्ति के खिलाफ बिजली अधिनियम की धारा 126 के तहत कार्यवाही शुरू की गई थी।

यह धारा बिजली चोरी के आकलन से संबंधित है। हाई कोर्ट ने अधिनियम की धारा 145 का हवाला देते हुए कहा कि धारा 126 से जुड़े मामलों में सुनवाई करना सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ यह मामला 29 जून को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने और रिकार्ड पर उपलब्ध सामग्रियों को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद हमारा मानना है कि इस मामले में अटार्नी जनरल की मदद की दरकार है।