बाड़मेर में ऊंट पर सवार होकर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं शिक्षक

 


बाड़मेर में ऊंट पर सवार होकर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं शिक्षक। फाइल फोटो

 सरहदी जिले बाड़मेर में शिक्षक ऊंट से रेगिस्तानी इलाकों में ऐसे छात्रों के घरों तक जा रहे हैं जिनके यहां मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ये शिक्षक बाड़मेर जिले में अपने स्कूलों तक पहुंचने के लिए दिन में तीन बार ऊंट की सवारी करते हैं।

बाड़मेर, संवाद सूत्र। कोरोना महामारी के बीच छात्रों के अध्ययन और अध्यापन को लेकर तकरीबन डेढ़ साल से अधिक समय से विद्यालय बंद हैं। ऐसे में अब राजस्थान सरकार की एक मुहिम के तहत दूर-दराज इलाकों के रेगिस्तानी क्षेत्रों में ऊंट के जरिए अध्यापक बच्चों के घर पढ़ाने जाएंगे। ऐसा इसलिए किया गया है कि दूर-दराज इलाकों में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या भी है। साथ ही, बच्चों के पास स्मार्टफोन का ना होना भी एक कारण है। सरहदी जिले बाड़मेर में इसे प्राथमिक कोशिश के रूप से देखा जा रहा है, यहां शिक्षक स्कूल को ही छात्रों के दरवाजे तक ले जा रहे हैं। सरहदी जिले बाड़मेर में शिक्षक ऊंट से रेगिस्तानी इलाकों में ऐसे छात्रों के घरों तक जा रहे हैं, जिनके यहां मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं।

निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, ये शिक्षक बाड़मेर जिले में अपने स्कूलों तक पहुंचने के लिए दिन में तीन बार ऊंट की सवारी करते हैं। राजस्थान शिक्षा विभाग के निदेशक सौरव स्वामी ने कहा कि 75 लाख छात्रों में से कई के पास मोबाइल फोन नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया कि कक्षा एक से आठ के लिए टीचर्स हफ्ते में एक बार उनके घर जाएंगे और कक्षा नौ से 12 के लिए हफ्ते में दो बार जाएंगे। राजस्थान सरकार की इस पहल को बड़ा ही सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है, जहां बच्चों को शिक्षा का ज्ञान देने के लिए एक अभिनव पहल के रूप में ऊंट की सवारी कर शिक्षक रेगिस्तान इलाकों में बनी ढाणियों में जाकर सामूहिक दोनों के रूप में शिक्षा का ज्ञान दे रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी बाड़मेर मैं मोबाइल नेटवर्क को लेकरआई समस्याओं को देखते हुए विद्यार्थी ऊंचे टीलों पर जाकर विद्यार्जन करते थे। इसके बाद लगातार स्कूल के अवकाश और कोरोना में बढ़े ऑनलाइन क्लास के चलन ने यहा के विद्यार्थियों की मुश्किलें बढ़ा दी थी। इसके बाद इस अभिनव पहल का चहुओर स्वागत हो रहा है।