कवि गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि पर कुमार विश्वास ने पढ़ी राष्ट्रकवि दिनकर की सुंदर कविता, शेयर किया वीडियो

 


कुमार विश्वास ने भी अपने अंदाज में उनको श्रद्धांजलि अर्पित की।

कवि कुमार विश्वास ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि आज गीत-गंधर्व नीरज जी की पुण्यतिथि है। राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ जी ने गीतकार की मृत्यु पर एक बहुत सुंदर गीत लिखा था तो नीरज जी ने दिनकर जी के गीत का उत्तर देते हुए गीतकार के जन्म पर गीत रचा।

नई दिल्ली, । आज कवि गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि है। इस मौके पर कुमार विश्वास ने भी अपने अंदाज में उनको श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता का पाठ किया। कवि कुमार विश्वास ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि आज गीत-गंधर्व नीरज जी की पुण्यतिथि है। राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ जी ने गीतकार की मृत्यु पर एक बहुत सुंदर गीत लिखा था तो नीरज जी ने दिनकर जी के गीत का उत्तर देते हुए गीतकार के जन्म पर गीत रचा। साहित्य के सरस वैभिन्य आज नीरज जी के प्रयाण दिवस पर सुनिए यह नवनीत...इसके बाद उन्होंने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने उस कविता को आवाज दी है।

गोपालदास नीरज का फिल्मी दुनिया का सफर

साहित्य के अलावा नीरज को हिंदी फिल्मी गीतों को नया तेवर, नई चीजें और संस्कार देने के लिए भी जाना जाता है। यदि गीतकार के तौर पर उनकी पहली फिल्म की बात करें तो वो संगीतकार रोशन के साथ 'नई उमर की नई फसल' थी, जिसमें उन्होंने कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे' और 'आज की रात बड़ी शोख बड़ी नटखट है' ने उस समय काफी वाहवाही बटोरी थी। ये उस समय के ऐसे गीत थे जो लोगों की जुबान पर चढ़ जाया करते थे।आज गीत-गंधर्व नीरज जी की पुण्यतिथि है।राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ जी ने गीतकार की मृत्यु पर एक बहुत सुंदर गीत लिखा था तो नीरज जी ने दिनकर जी के गीत का उत्तर देते हुए गीतकार के जन्म पर गीत रचा। साहित्य के सरस वैभिन्य आज नीरज जी के प्रयाण दिवस पर सुनिए यह नवनीत❤️

उनकी उस समय की कई चर्चित फिल्में भी हैं जिसके लिए उन्होंने गाने लिखे और नए प्रयोग किए। उनकी चर्चित फिल्मों में मेरा नाम जोकर, गैम्बलर, तेरे मेरे सपने, पहचान, पतंगा, प्रेम पुजारी, कल आज और कल, चंदा और बिजली, फरेब, लाल पत्थर और कन्यादान शामिल हैं।उनको छंदबद्ध गीतों और उनको सौन्दर्य देने के लिए जाना जाता है। एक बात ये भी सच है कि उनको हिंदी सिनेमा में छंदमुक्त गीतों के रचयिता के लिए भी जाना जाता है। राज कपूर की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का पहला छंदमुक्त गीत उन्होंने ही लिखा था। उनके लिखे कई गानों को संगीतकार धुन देने में काफी समय लगा देते थे, नए तरह के गीतों को धुन देना आसान नहीं होता था।

ऐ भाई, जरा देख के चलो'! गीत आपने भी कभी न कभी सुना होगा, ये गीत उन्होंने ही लिखा था। संगीतकार उनके इस गीत को धुन नहीं दे पा रहे थे उसके बाद संगीतकार ने नीरज जी से कहा कि यदि आपको इस गाने को धुन देनी हो तो आप कैसे गाएंगे फिर नीरज जी ने अपने अंदाज में इसे गाया, उसके बाद इस गाने को वो ही धुन दी गई, इस लाइन को ऐसे ही अंदाज में संगीत दिया गया। ऐसे अनगिनत किस्से नीरज जी के साथ जुड़े हुए हैं।