बनारसी साड़ियों पर दमक रहा हुनर का 'डिजिटल पंचकार्ड' जानें- करोबार को कैसे आसान कर रही मशीन

 


डिजिटल पंचकार्ड से कताई-बुनाई व डिजाइन पहले से सस्ती हुई (फोटो जागरण)

आइआइटी धनबाद के पूर्व छात्रों की बनाई डिजिटल पंचकार्ड मशीन से बनारसी साड़ी का कारोबार वर्चुअल हो गया है। मशीन के कारण कम जगह तीन गुना कम लागत समय की बचत हो रही है। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम मंत्रालय भी अब मदद के लिए आगे आया है।

 वाराणसी। बनारसी साड़ी के कारोबार पर कोरोना महामारी के करीब डेढ़ साल भारी पड़े हैं। आपदा ने बनारस के छोटे-बड़े हथकरघा कारीगरों और बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। मुसीबत की घड़ी में उम्मीद की किरण दिखाई है बनारस में रहने वाले आइआइटी-धनबाद के पूर्व छात्र नित्यानंद व शणमुख कृष्णा ने। इनके बनाए डिजिटल पंचकार्ड से कताई-बुनाई व डिजाइन पहले से सस्ती व आसान तो हुई ही है कारोबार को भी वर्चुअल प्लेटफार्म पर विस्तार देने में भी मदद मिल रही है।

साड़ी व सूट पर मनपसंद डिजाइन 

ग्राहक दुनिया में कहीं से भी मनपसंद डिजाइन के लिए फोटो ईमेल कर सकता है। फोटो पेन ड्राइव में कापी कर डिजिटल पंचकार्ड के डिस्प्ले में लगाते ही वह डिजाइन बनारसी साड़ी या सूट पर छप जाता है। तीन गुना कम लागत, कम जगह घेरने के साथ एक साड़ी तैयार करने में हफ्तों के समय की बचत इस मशीन की खूबियां हैैं।

कुछ अलग करने को छोड़ा लाखों का पैकेज 

नित्यानंद ने बताया कि आइआइटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद लाखों के पैकेज की नौकरी कर रहे थे, लेकिन कुछ अलग करना चाहते थे। कोरोना काल में बुनकरों की बदहाली पर नजर गई तो उनकी मदद के मकसद से डिजिटल पंचकार्ड मशीन बनाई। अभी पांच बुनकरों ने यह मशीन लगवाई हैै। एक मशीन की लागत करीब 80,000 रुपये आती है, जिसे बुनकरों को एक लाख में मुहैया करा रहे हैैं। सूक्ष्म, लघु व मध्यम मंत्रालय (एमएसएमई) से 12 लाख की मदद स्वीकृत हुई है, जो जल्द मिलेगी।

प्रदेश के बाहर तैयार हो रहा बाजार :

पावरलूम में डिजिटल पंचकार्ड इंस्टाल कराने वाले बुनकर मुहम्मद यासीन बताते हैैं कि पहले बनारसी साड़ी की डिजाइन को बदलने के लिए हैंडलूम मशीन में हर बार नया पंचकार्ड लगाना पड़ता था। इसमें 15-20 दिन लगते और पैसा खर्च होता। सामान्य पंचकार्ड जगह काफी घेरता है और चलाने के लिए तीन-चार कारीगर चाहिए। डिजिटल पंचकार्ड से प्रदेश के बाहर बाजार तैयार हो रहा है। लोग मनपसंद डिजाइन ईमेल पर भेजते हैं और हम तय समय में बनारसी साड़ी और सूट बनाकर दे रहे हैैं।

अब तकनीक की जरूरत

यह तकनीक अब हालात जरूरत भी है। डिजिटल पंचकार्ड समय व संसाधनों संग कोरोना से बचाव करेगा। ऐसी तकनीक हर बुनकर के हाथ में होनी चाहिए। हालांकि मशीन की व्यवहारिकता पर जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।