.. तो इसलिए बिगड़ रहे बच्चे, पढ़ाई के नाम पर मोबाइल पर कर रहे गंदा काम; पढ़ें यह चौंकाने वाला खुलासा

 

Jharkhand News 30 प्रतिशत बच्चे आठ घंटे से ज्यादा समय मोबाइल पर बीता रहे हैं।

30 प्रतिशत बच्चे आठ घंटे से ज्यादा समय मोबाइल पर बीता रहे हैं। 24 प्रतिशत किशोरियों ने सोशल साइट्स पर न्यूड और सेमी न्यूड तस्वीरें शेयर की है। 70 प्रतिशत बच्चे अपनी उम्र बढ़ाकर एडल्ट साइट्स पर एंट्री कर रहे हैं।

रांची। कोरोना काल में इंटरनेट मीडिया के प्रति जुड़ाव बढ़ गया है। सारे कामकाज इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर हो रहे हैं। चाहे स्कूल काॅलेज हों या निजी और सरकारी कंपनियां। हालांकि इस बीच इसके नकारात्मक प्रभाव भी बढ़े हैं। कहीं साइबर फ्रॉड के रूप में तो कहीं बच्चों के बिगड़ने के रूप में। इस नकारात्मक प्रभाव ने समाज के लिए चिंता बढ़ा दी है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट दीपक कुमार बाल संरक्षण विषय पर काम करने वाली संस्था गाइड चाइल्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हैं। बताते हैं कि 70 प्रतिशत बच्चे अपनी उम्र बढ़ाकर एडल्ट साइट्स पर एंट्री करते हैं। इसके बाद अश्लील चैट कर रहे हैं। कई तरह के अश्लील एप पर भी बच्चों का समय बीत रहा है।

चौंकाने वाली है रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट मीडिया पर 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो आठ घंटे से अधिक समय बिता रहे हैं। 24 प्रतिशत किशोरियों ने माना है कि उन्होंने न्यूड तस्वीर या सेमी न्यूड तस्वीर शेयर की है। ये शेयरिंग एप वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलिग्राम सहित अन्य एप पर किए जा रहे हैं। 46 प्रतिशत बच्चों ने अश्लील सामग्री देखने की बातें स्वीकार की हैं। इतना ही नहीं, 67 प्रतिशत किशोर और 60 प्रतिशत युवतियां सोशल साइट्स पर अश्लील पोस्ट करते हैं। लॉकडाउन में बच्चों की मोबाइल पर निर्भरता बढ़ी है।

साइबर अपराध बढ़ा

दीपक कुमार कहत हैं कि इसकी वजह से साइबर अपराध भी बढ़ गया है। बच्चे साइबर क्रिमिनल के साॅफ्ट टारगेट बन रहे हैं। कई गेमिंग एप के जरिए भी बच्चों को मोहरा बनाकर रुपये ऐंठे जा रहे हैं।

बच्चे एडल्ट साइट्स पर ऐसे बिता रहे समय  

समय अवधि                 प्रतिशत में

2 घंटा या उससे कम : 20

2 से 4 घंटे : 24

4 से 8 घंटे : 35

8 घंटे से अधिक : 30

बिल्कुल भी प्रयोग नहीं : 6

ये सावधानी जरूरी

-पढ़ाई या जरूरी काम के अलावा मोबाइल और कंप्यूटर के अधिक प्रयोग की इजाजत न दें।

-समय-समय पर ब्राउजिंग हिस्ट्री खंगालें।

-अगर ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट कर दिया गया है तो कारण पूछें।

-सर्चिंग प्लेटफार्म पर जाकर माई एक्टिविटी डॉट कॉम पर क्लिक करें।

-सोशल साइट्स के दोस्तों पर नजर रखें।

-कभी भी अपनी निजी तस्वीरें शेयर न करें, संबंध विच्छेद के समय इसका गलत प्रयोग किया जाता है।

-सोशल साइट्स की आइडी को हमेशा सुरक्षित रखें, ताकि आपके फोटोग्राफ डाउनलोड न हो पाए, या स्क्रीनशॉट न लिया जा सके।

काउंसिलिंग भी जरूरी

-बच्चों के एटीट्यूड पर नजर रखें।

-बच्चा किस-किस बात पर चिढ़ता है, गुस्सा करता है।

-ध्यान दें कि बच्चे कहीं डरे-सहमे तो नहीं रहते।

-बच्चों का सिम एप अपने मोबाइल में रखें और प्रत्येक महीने की कॉल हिस्ट्री जांच करें।

-बच्चों से हमेशा खुलकर दोस्तों जैसा व्यवहार करें और फोटोग्राफ्स अपलोड करने, उसके मिस यूज और सोशल साइट्स के मानसिक और भौतिक नुकसान के बारे में हमेशा अवगत कराएं।

-इंटरनेट एडिक्शन और उसके बुरे प्रभाव के बारे में भी बच्चों को अवगत कराएं।

-एडल्ट साइट के मानसिक दुष्परिणाम के बारे में बच्चों को अवगत कराएं।

-बच्चों को बताएं कि वे अगर अपनी निजी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं तो कहीं ना कहीं वह मानसिक रोग से ग्रस्त हो रहे हैं।

'बच्चों की एडल्ट साइट्स पर एंट्री चिंताजनक है। इसके कई दुष्परिणाम हैं। इससे मनोविकार उत्पन्न हो सकता है। इससे बच्चे-बच्चियों को बचाने के लिए विशेष सावधानी की जरूरत है। अभिभावक समय-समय पर बच्चों की काउंसिलिंग करें।' -जेपी मिश्रा, मनोविश्लेषक।