डीटीसी लो फ्लोर बसों के रखरखाव की जांच समिति ने रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपी, टेंडर रद करने की सिफारिश


शिकायत बसों के रखरखाव के लिए अनुबंध से संबंधित है, इसलिए जांच इसी पर केंद्रित है।

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की लो फ्लोर बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव को लेकर भाजपा विधायकों की शिकायत पर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल अनिल बैजल को सौंप दी है। समिति ने बसों के रखरखाव के लिए जारी टेंडर रद करने की सिफारिश की है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की लो फ्लोर बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव को लेकर भाजपा विधायकों की शिकायत पर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल अनिल बैजल को सौंप दी है। समिति ने बसों के रखरखाव के लिए जारी टेंडर में नियमों का पालन नहीं किए जाने का हवाला देते हुए इसे रद करने की सिफारिश की है। इस काम के लिए नए सिरे से टेंडर जारी करने और प्रतिस्पद्र्धा में ज्यादा कंपनियों को शामिल करने की सलाह दी गई है। वहीं, वारंटी की अवधि में रखरखाव के लिए कंपनियों के भुगतान के दिल्ली सरकार के फैसले को सही ठहराया गया है।

समिति ने कहा कि शिकायत बसों के रखरखाव के लिए अनुबंध से संबंधित है, इसलिए जांच इसी पर केंद्रित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बसों की खरीद व इसके रखरखाव के अलग-अलग टेंडर पांच माह के अंतराल पर जारी किए गए हैं, लेकिन इसके कारण नहीं बताए गए हैं। साथ ही प्रतिस्पद्र्धा बढ़ाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में ज्यादा कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। बोली प्रक्रिया में सिर्फ बस आपूर्ति करने वाली दोनों कंपनियां शामिल हुईं। वार्षिक रखरखाव की न्यूनतम बोली निर्धारित करने की प्रक्रिया का भी दस्तावेज में उल्लेख नहीं है। इन खामियों को उठाते हुए समिति ने टेंडर को निरस्त करके फिर से इसे जारी करने को कहा है।

हालांकि, वारंटी अवधि में बसों के रखरखाव के लिए भुगतान करने को लेकर भाजपा विधायकों की शिकायत को समिति ने खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि नियम के मुताबिक वारंटी की अवधि खत्म होने के बाद रखरखाव का भुगतान किया जाना चाहिए, हालांकि इसमें जरूरत के अनुसार बदलाव भी संभव है। लो फ्लोर बस खरीद मामले में वारंटी अवधि के दौरान आपूर्तिकर्ता द्वारा मुख्त रखरखाव व भुगतान वाले काम में अंतर स्पष्ट किया गया है। इसे गलत नहीं कहा जा सकता है।

ये है मामला है

दिल्ली सरकार ने जनवरी में 890 करोड़ रुपये में एक हजार लो फ्लोर बसें खरीदने के लिए दो कंपनियों को आर्डर दिए थे। जेबीएम आटो लिमिटेड से सात सौ व टाटा मोटर्स से तीन सौ बसों की आपूर्ति होनी है। भाजपा का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करके इन कंपनियों को बसों की आपूर्ति होने पर पहले दिन से ही इनके रखरखाव के लिए भुगतान किया जाएगा।

विधायकों ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से की थी। सरकार से एसीबी को जांच की अनुमति नहीं मिलने पर भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल से इसकी शिकायत की थी। उपराज्यपाल ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति में सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी ओपी अग्रवाल, दिल्ली के प्रधान सतर्कता सचिव व प्रधान यातायात सचिव शामिल थे। वहीं, सरकार ने जांच पूरी होने तक बस की खरीद प्रक्रिया रोक दी थी।

दिल्ली प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व रोहिणी के विधायक का बयान

केंद्र की भाजपा सरकार की जांच समिति बसों की खरीद में कोई खामी या गड़बड़ी नहीं निकाल पाई है। जांच समिति की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व की ईमानदार सरकार काम कर रही है। मनीष सिसोदिया, उपमुख्यमंत्री परिवहन विभाग की जांच खुद उसके प्रधान सचिव कर रहे हैं, इसलिए उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। दोषियों को बचाने के लिए टेंडर रद करने की बात की गई है। यदि गड़बड़ी नहीं है तो टेंडर क्यों रद किया जा रहा है।