कोरोना वैक्‍सीन को लेकर यूरोपीय संघ के दोगला बर्ताव दे रहा है गलत संदेश, जानें- विशेषज्ञों की राय


अन्‍य देशों की बनाई वैक्‍सीन के साथ ईयू कर रहा गलत बर्ताव
यूरोपीय संघ दुनिया के कुछ हिस्‍सों में लगाई जाने वाली कोरोना वैक्‍सीन के प्रति अपना दोगला बर्ताव कर रहा है उससे अधिकतर विशेषज्ञ नाखुश हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय संघ के इस बर्ताव से गलत संदेश जाएगा।

लंदन (एपी)। यूरोपीय संघ विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा मंजूर की गई कोरोना वैक्‍सीन को लेकर एक समान बर्ताव नहीं कर रहा है। इसकी वजह से लाखों लोगों को मुश्किलें आ रही है। दरअसल यूरोपीय संघ ने अपने यहां पर आने वालों के लिए शर्त रखी है कि उन्‍हें केवल यूरोपीय संघ की मेडिसिन एजेंसी द्वारा मंजूर की गई वैक्‍सीन ही लगी होनी चाहिए। इस वजह ये अन्‍य वैक्‍सीन की एक या दोनों डोज लगवा चुके लोग भी यूरोप नहीं जा पा रहे हैं।इस बारे में अधिकतर जानकार यूरोप को इसके लिए गलत ठहरा रहे हैं। 

स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों का कहना है कि हालात केवल पर्यटन के लिहाज से ही मुश्किल या खराब नहीं है बल्कि दो अर्थव्‍यवस्‍थाओं को भी प्रभावित करते हैं। वहीं दूसरी तरफ इस तरह का भेदभाव वैक्‍सीन के प्रति हमारे भरोसे को भी कहीं न कहीं कम करता है, जबकि दोनों जगहों पर एक ही वैक्‍सीन है। इसके बाद भी एक वैक्‍सीन को कमतर बता रहे हैं। जैसे जैसे यूरोप और दूसरे देशों में अधिक से अधिक लेागों को वैक्‍सीन दी जा रही है वैसे-वैसे ही ये देश अपने यहां पर पर्यटन को दोबारा ऊंचाई पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि ये देश अपने यहां पर लगे प्रतिबंधों को हटा रहे हैं।इटरनेशनल रेस्‍क्‍यू कमेटी के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर मेस्फिन टेक्‍लू का कहना है कि ऐसे देश जो विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा मंजूर की गई वैक्‍सीन को भी मान्‍यता नहीं दे रहे हैं वो वो वैज्ञानिक सुबूतों को झुठलाने की कोशिश कर हैं। ऐसी सभी वैक्‍सीन जो विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के नियमों पर खरी उतरती हैं उनको मान्‍यता दी जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो ये भेदभाव ही माना जाएगा। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी सभी देशों से अपील की है कि वो चीन की बनाई वैक्‍सीन के साथ अन्‍य वैक्‍सीन को भी मान्‍यता प्रदान करें। जो देश ऐसा नहीं करता है वो वैक्‍सीन के प्रति अविश्‍वास को बढ़ाने का का ही काम कर रहा है। ऐसा करके वो देश दुनिया के लाखों लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

गौरतलब है कि जून में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदर पूनावाला ने ट्वीट किया था और उनकी वैक्‍सीन लेने वाले भारतीयों के यूरोप जाने में आ रही रुकावट के प्रति चिंता व्‍य‍क्‍त की थी। उन्‍होंने ये भी कहा था कि वो इस मुद्दे को सभी देशों के साथ उठाएंगे।

स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का ये भी कहना है कि वैक्‍सीन को मान्‍यता न देने वाले देश इस संबंध में किए जा रहे प्रयासों को मुश्किलों में डालने का काम कर रहे हैं।यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के डाक्‍टर रघीब अली का कहना है कि आप हमेशा के लिए इस तरह का फैसला नहीं ले सकते हैं कि कुछ देशों के लोगों को सिर्फ इस वजह से अपने यहां पर आने से रोक दें कि उन्‍होंने दूसरी वैक्‍सीन ली है, जिसको विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने एप्रूव्‍ड किया है और से महामारी के प्रति सुरक्षा प्रदान करती है।