खेतों में हल जोतने वाले किसान अब सूट-बूट पहनकर करेंगे व्यापार

 


राजौरी के लंबेड़ी में 200 कनाल जमीन पर सात करोड़ रुपये की लागत से यह इंस्टीट्यूट तैयार हो रहा है।

जम्मू के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए और उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों से रूबरू करवाने के साथ बाजार में उतारने के लिए जम्मू-कश्मीर में पहला प्रशिक्षण संस्थान स्थापित हो रहा है। यह फार्मर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट अगले 18 महीनों में बनकर तैयार होगा।

जम्मू। धरती का सीना चीर कर पैदावार करने वाले जम्मू संभाग के किसानों को अब अपनी मेहनत की अच्छी कीमत पाने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जम्मू के यह किसान अब खेतों में केवल हल ही नहीं चलाएंगे, अपनी पैदावार की अच्छी कीमत पाने के लिए खुद ही उसकी पैकेजिंग व मार्केटिंग भी करेंगे और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसे बेचने में सक्षम भी होंगे।

फार्मर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट अगले 18 महीनों में बनकर तैयार होगा

जम्मू के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए और उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों से रूबरू करवाने के साथ बाजार में उतारने के लिए जम्मू-कश्मीर में पहला प्रशिक्षण संस्थान स्थापित हो रहा है। यह फार्मर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट अगले 18 महीनों में बनकर तैयार होगा जहां किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करते हुए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राजौरी के लंबेड़ी में 200 कनाल जमीन पर सात करोड़ रुपये की लागत से यह इंस्टीट्यूट तैयार हो रहा है। इस इंस्टीट्यूट के तैयार होने से जम्मू, रियासी, ऊधमपुर, राजौरी-पुंछ व अन्य जिलों के किसानों को फायदा होगा। गत दिनों कृषि विभाग के निदेशक केके शर्मा व भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना ने इस इंस्टीट्यूट के लिए भूमि पूजन करने के साथ नींव पत्थर रखा। निर्माण के लिए पूरे इलाके को समतल कर दिया गया है और अब यहां जोरों-शोरों से निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट बनाने के लिए नाबार्ड ने फंडिंग की है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक देंगे प्रशिक्षण

किसानों को बेहतर बीज बनाने से लेकर खाद डालने व पैदावार बढ़ाने के गुर सिखाने के लिए इस इंस्टीट्यूट में राष्ट्रीय स्तर के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक भी प्रशिक्षण देंगे। इसके लिए कृषि विभाग जम्मू ने हैदराबाद सरकार के साथ समझौता किया है। ये वैज्ञानिक पैदावार बढ़ाने के लिए हर क्षेत्र में उसकी क्षमता अनुसार की जाने वाली पैदावार बारे किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। इंस्टीट्यूट में शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्व विद्यालय जम्मू के वैज्ञानिक नियमित प्रशिक्षण देंगे और उन्हें खेती में इस्तेमाल हो रही अत्याधुनिक तकनीकों से रूबरू करवाएंगे।

छह महीने तक के होंगे कोर्स

इस इंस्टीट्यूट में एक दिन से लेकर छह महीने तक के विभिन्न कोर्स कराए जाएंगे। किसानों के लिए यह कोर्स पूरी तरह से मुफ्त होंगे जबकि डीलरों व कृषि विभाग के कर्मचारियों को ये कोर्स करने के लिए फीस चुकानी होगी। किसानों को यहां पर कुछ ऑनलाइन कोर्स भी कराए जाएंगे। इसमें फर्टीलाइजर कोर्स से लेकर पैकेजिंग कोर्स शामिल रहेंगे। फूड प्रोसेसिंग के गुर भी किसान इस इंस्टीट्यूट में सीख पाएंगे।

कौशल विकास पर रहेगा पूरा ध्यान

प्रदेश के इस पहले फार्मर्स इंस्टीट्यूट में किसानों के कौशल विकास को ध्यान में रखकर विशेष कोर्स शुरू किए जाएंगे। फूड प्रोसेसिंग से लेकर पैकेजिंग तक के कोर्स यहां करवाए जाएंगे ताकि किसान केवल पैदावार तक ही सीमित न रहकर उसे बेहतर ढंग से प्रस्तुत भी कर सके। इंस्टीट्यूट में किसानों को बाजार के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाएगी ताकि किसान खुद अपनी फसल को अच्छे दाम पर बाजार में बेच सके। इसके लिए किसानों को ई-मार्केटिंग से जोड़ने के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय संगठनों से जोड़ा जाएगा ताकि किसानों को एक व्यापक बाजार मिल सके।

खेती से लेकर मार्केटिंग तक के सभी गुर सिखाए जाएंगे 

इस इंस्टीट्यूट के बनने से जम्मू संभाग के किसानों को काफी फायदा होगा। वे न केवल अपनी पैदावार बढ़ाने में सक्षम होंगे, बल्कि अपने लिए बेहतर बाजार भी हासिल कर पाएंगे। यहां उन्हें खेती से लेकर मार्केटिंग तक के सभी गुर सिखाए जाएंगे। इंस्टीट्यूट में ही किसानों के ठहरने व खाने-पीने की व्यवस्था होगी और यह सब उनके लिए मुफ्त होगा। अगले डेढ़ साल में यह इंस्टीट्यूट तैयार हो जाएगा और इसके बनने से जम्मू के किसानों की स्थिति काफी बेहतर हो जाएगी।