कोरोना संक्रमण से मुकाबले में नए उपचार की पहचान, प्रोटीज एंजाइम से किया जा सकेगा इलाज


गंभीर संक्रमण से बचने के साथ ही फेफड़ों में वायरल लोड में पाई गई कमी

ये प्रोटीज इंहिबटर एंटीवायरल दवाओं का एक वर्ग है। इस वर्ग की दवाएं वायरल एंजाइम से जुड़ने के साथ प्रोटीन की सक्रियता को रोकने का काम करती हैं। संक्रामक वायरल पार्टिकल की उत्पत्ति के लिए प्रोटीन की जरूरत पड़ती है।

वाशिंगटन, प्रेट्र। कोरोना वायरस (कोविड-19) से जंग में नए उपचारों और दवाओं की तलाश में निरंतर शोध किए जा रहे हैं। इसी कवायद में शोधकर्ताओं को कोरोना संक्रमण से मुकाबले में एक उपचार की पहचान करने में सफलता मिली है। यह नया उपचार चूहों में वायरस की प्रतिकृति बनने से रोकने में प्रभावी पाया गया है।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की प्रोसिडिंग्स पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कोरोना संक्रमित पशु मॉडल का एक प्रोटीज एंजाइम से इलाज किया गया। इसके माध्यम से हुए उपचार से बचने की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ही फेफड़ों में वायरल लोड में कमी पाई गई।

ये प्रोटीज इंहिबटर एंटीवायरल दवाओं का एक वर्ग है। इस वर्ग की दवाएं वायरल एंजाइम से जुड़ने के साथ प्रोटीन की सक्रियता को रोकने का काम करती हैं। संक्रामक वायरल पार्टिकल की उत्पत्ति के लिए प्रोटीन की जरूरत पड़ती है।

अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर युंजोंग किम ने कहा, 'हमने बिल्लियों में कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए प्रोटीज इंहिबटर जीसी376 विकसित किया है। यह अब व्यावसायिक इस्तेमाल के लिहाज से विकास की प्रक्रिया में है।'उन्होंने बताया, 'मौजूदा महामारी शुरू होने के बाद कई रिसर्च समूहों ने बताया कि यह इंहिबटर उस कोरोना वायरस के खिलाफ भी प्रभावी हो सकता है, जो कोविड-19 का कारण बनता है। इस समय उपचार के तौर पर प्रोटीज इंहिबटर के विकास पर कई शोध किए जा रहे हैं।'

शोधकर्ताओं की टीम ने जीसी376 में बदलाव कर इसके प्रभाव को कोविड-19 के खिलाफ आजमाया। यह परीक्षण कोविड-19 का कारण बनने वाले सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित चूहों पर किया गया। इसका नतीजा उत्साहजनक बताया गया है।