विपक्षी दलों के सांसदों को चेतावनी पत्र देगा संयुक्त किसान मोर्चा, संसद भवन पर प्रदर्शन का एलान

 

सोनीपत : बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते संयुक्त मोर्चा के नेता।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बताया कि 22 जुलाई से लगातार बार्डर से आंदोलनकारी संसद मार्ग पर जाकर प्रदर्शन करेंगे। इसी तरह आठ जुलाई को देशभर में पेट्रोल डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हाईवे के किनारे 10 से 12 बजे तक प्रदर्शन करेंगे।

नई दिल्ली/सोनीपत,संवाददाता। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की रविवार को बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान आंदोलनकारी संसद भवन पर प्रदर्शन करेंगे। 19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पूर्व 17 जुलाई को सभी विपक्षी दलों के सांसदों को चेतावनी पत्र देकर संसद में चुप्पी तोड़ने या कुर्सी छोड़ने की मांग की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता और एमएसपी पर कानून बनाने की बात नहीं होती, तब तक विपक्षी सांसद संसद न चलने दें। 22 जुलाई से लगातार बार्डर से आंदोलनकारी संसद मार्ग पर जाकर प्रदर्शन करेंगे।

पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हाईवे पर प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बताया कि इसी तरह आठ जुलाई को देशभर में पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हाईवे के किनारे 10 से 12 बजे तक गाड़ियां, गैस सिलेंडर के साथ प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान रोड जाम नहीं किया जाएगा। 12 बजे सभी गाड़ियों के आठ मिनट तक हार्न बजाकर सरकार को जगाने का काम किया जाएगा।किसान मोर्चा के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि फरीदाबाद के खोरी गांव को उजाड़ने के विरोध में छह जुलाई को प्रधानमंत्री आवास पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार काे वहां रहने वाले सभी लोगों के पुनर्वास का इंतजाम होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार के पास रास्ते होते हैं। सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।

बता दें कि केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ किसान संगठन कई महीने से दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। भाकियू नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में आंदोलन कारी यूपी गेट पर भी धरना दे रहे हैं। कृषि कानूनों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई लेकिन बात नहीं बनी। किसान संगठन कृषि कानून को रद करवाने की मांग पर अड़े हैं जबकि केंद्र सरकार इसमें संसोधन करना चाहती है। इसे रद करने से मना कर रही है।