दक्षिण पूर्वी एशिया में कोरोना से हाल बेहाल, कहीं ऑक्‍सीजन संकट तो कहीं नहीं मिल रही दफनाने की जगह


इंडोनेशिया और म्‍यांमार में कोरोना की स्थिति गंभीर

दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में कोरोना से हालात खराब हो रहे हैं। इंडोनेशिया और म्‍यांमार में ऑक्‍सीजन संकट गहरा रहा है। मलेशिया में शवों को दफनाने के लिए नई जगह तलाश की जा रही है। अस्‍पताल मरीजों से भर चुके हैं।

कुआला लामपुर (एपी)। इंडोनेशिया में कोरोना मामलों के बढ़ने से हाल बेहाल हो रहा है। यहां पर आक्‍सीजन की कमी को देखते हुए सरकार ने पूरे ऑक्‍सीजन प्रोडेक्‍शन का केवल चिकित्‍सीय सेवा में उपयोग करने का आदेश दे दिया है। आपको बता दें कि इंडोनेशिया में करीब दो सप्‍ताह से आक्‍सीजन संकट बना हुआ है। इससे पहले इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने प्रोडेक्‍शन को बढ़ाने के निर्देश दिए थे। यहां पर बढ़ते मामलों पर आक्‍सीजन संकट लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है।

मलेशिया में भी हालात काफी गंभीर हैं। वहां पर अस्‍पताल पूरी तरह से मरीजों से भरे हुए हैं। इस वजह से कोरोना मरीजों का इलाज रेसॉर्ट्स में भी किया जा रहा है। वहीं म्‍यांमार में कोरोना से मरने वालों की बढ़ती संख्‍या ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है। यहां के कर्बीस्‍तान में मजदूर दिन रात काम कर रहे हैं। कर्बीस्‍तान में जगह की कमी के चलते दूसरी जगहों पर शवों को दफनाने के लिए जगह तलाश की जा रही है। यहां पर भी ऑक्‍सीजन की किल्‍लत हो रही है।

अप्रैल और मई में इस तरह की तस्‍वीर भारत में भी सामने आई थी। हालांकि अब भारत में कोरोना के मामलों पर काफी हद तक लगाम लगाने में सफलता हासिल हुई है। भारत की केंद्र और राज्‍य सरकार लगातार इसको लेकर काम कर रही हैं। खुद पीएम मोदी लापरवाह लोगों को अपने संदेश में चेतावनी दे चुके हैं। भारत को छोड़कर इस क्षेत्र के अन्‍य देशों में हालात काफी खराब होते दिखाई दे रहे हैं। एपी के मुताबिक मलेशिया में सेलेनगोर के एक सरकारी अस्‍पतालों में अब और मरीजों को लेने की क्षमता नहीं बची है। इसलिए जहां-तहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आपको बता दें कि सेलेनगोर में मलेशिया का सबसे अधिक अमीर शहर है, जहां काफी संख्‍या में अमीर लोग रहते हैं। सरकार की तरफ से कुछ अस्‍पतालों में बड़ बढ़वाए गए हैं।

आको बता दें कि इन तीनों देशों में जून के बाद से कोरोना के मामलों में जबरदस्‍त तेजी आई है। पिछले एक सप्‍ताह के दौरन इंडोनेशिया में 4.17 फीसद, म्‍यांमार में 7.02 फीसद और मलेशिया में करीब 3.18 फीसद मामले बढ़े हैं। वहीं कंबोडिया और थाईलैंड में भी मामलों के साथ इससे होने वाली मौतों में भी इजाफा हुआ है। हालांकि पिछले सात दिनों की यदि बात करें तो यहां पर देा फसद की भी कम दर से मामले बढ़े हैं। दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में कोरोना की स्थिति डराने वाली है। कुछ देशों में जहां इसको रोकने के उपाय तुरंत और कारगर किए जा रहे ळैं वहीं कुछ देशों में इसकी कमी साफतौर पर देखी जा रही है।

दुनिया के चौथे सबसे घनी आबादी वाले देश इंडोनेशिया में बुधवार को 1383 मौतें हुई थीं। ये महामारी की शुरुआत से अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यहां पर जनू के मध्‍य में 8 हजार मामले सामने आ रहे थे लेकिन अब 50 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसकी वजह यहां पर टेस्‍ट का कम होना भी है। माना जा रहा है कि यहां पर संक्रमितों और कोरोना से मरने वालों की संख्‍या सरकारी आंकड़ों से कही अधिक है।

रेड क्रॉस के अधिकारी अभिषेक रिमल का कहना है कि यदि लोग कोविड-19 नियमों का कड़ाई से पालन करने लगें, हाथ धोने लगें, एक दूसरे से दूरी कायम रखें और बिना हिचकिचाहट वैक्‍सीन लें तो आने वाले कुछ माह में मामलों में आई तेजी को रोका जा सकता है। मलेशिया में 13 जुलाई को दस हजार मामले सामने आने के बाद समूचे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। मलेशिया में वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम भी काफी धीमा है और अब तक यहां पर केवल 15 फीसद लोगों को ही कोविड-19 वैक्‍सीन दी जा सकी है। इसके बाद भी सरकार को उम्‍मीद है कि यहां पर इस वर्ष के अंत तक काफी बड़ी आबादी को वैक्‍सीन देने का काम पूरा हो जाएगा।