कोरोना रोधी वैक्सीन न लेने वालों को नौकरी पर जाने से नहीं रोका जा सकता : गुवाहाटी हाईकोर्ट

 


टीकाकरण के वास्ते मिजोरम सरकार द्वारा जारी नियमावली पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।

कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण के वास्ते मिजोरम सरकार द्वारा जारी नियमावली पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने मिजोरम सरकार के टीकाकरण के सिलसिले में जारी एसओपी को मनमाना करार दिया है।

आइजल, आइएएनएस। कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण के वास्ते मिजोरम सरकार द्वारा जारी नियमावली पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने मिजोरम सरकार के टीकाकरण के सिलसिले में जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को मनमाना करार दिया है। कहा कि किसी भी व्यक्ति को आजीविका के लिए जाने से नहीं रोका जा सकता। यह संविधान के अनुच्छेद 14,19 और 21 का उल्लंघन है।

मिजोरम सरकार ने 29 जून को जारी एसओपी में राज्य के लोगों के लिए कोविड से बचाव का टीका लगवाना अनिवार्य कर दिया है। नियमावली में कहा गया है कि जो लोग टीका नहीं लगवाएंगे, वे खरीदारी के लिए घर से बाहर नहीं निकल पाएंगे। वे नौकरी या आजीविका के सिलसिले में भी घर से नहीं निकल पाएंगे। दुकान में काम, ड्राइविंग या अन्य कोई ऐसा कार्य नहीं कर पाएंगे जिसमें अन्य लोग उनके आसपास रहते हों।

इसी मामले में दायर याचिका की सुनवाई कर हाईकोर्ट में जस्टिस माइकल जोथांखम और जस्टिस नेल्सन सेलो की पीठ ने मिजोरम सरकार के एसओपी को मनमाना करार दिया। कहा कि कोविड से बचाव का टीका लगवाने के लिए लोगों को जागरूक करना ठीक है लेकिन टीका लेने और न लेने वालों में मुश्किल पैदा करने वाला भेद करना उचित नहीं है। यह संविधान के प्रविधानों के खिलाफ है। इसलिए एसओपी के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है।पीठ मामले की सुनवाई 14 जुलाई को फिर करेगी। उस दिन मिजोरम के मुख्य सचिव को उपस्थित होकर एसओपी पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। वैसे मिजोरम के अतिरिक्त महाधिवक्ता सी जोराम्छना ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार टीकाकरण के लिए बड़े इंतजाम कर रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाने की कोशिश हो रही है। लेकिन कुछ लोग जान-बूझकर टीका नहीं लगवाना चाहते। उन्हें भी टीकाकरण अभियान में शामिल करने के लिए सरकार ने ये कड़े प्रविधान किए हैं।