दहेज प्रताड़ना के आरोपित पति पर चलेगा हत्या का मुकदमा, लड़की के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

 


सुप्रीम कोर्ट ने हत्या का मुकदमा रद करने का हाई कोर्ट का आदेश किया खारिज

गर्ग ने कोर्ट को मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी दिखाई जिसमें शव पर चोट के निशान पाए जाने की बात दर्ज है। उन्होंने कहा कि शव के पास सुसाइड नोट भी मिला था लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर मृतका के ही हैं।

 ब्यूरो, नई दिल्ली। दहेज प्रताड़ना के आरोपित पति पर हत्या का भी मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने लड़की के पिता की याचिका पर हत्या का मुकदमा रद करने का हाई कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को पुनरीक्षण शक्ति का इस्तेमाल उन मामलों में नहीं करना चाहिए जिसमें आइपीसी की धारा 302 में लगे अतिरिक्त आरोपों पर ट्रायल चल रहा हो और अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों का परीक्षण हो चुका हो।

यह आदेश जस्टिस आरएफ नारिमन, केएम जोसेफ और बीआर गवई की पीठ ने दिया। राजस्थान भरतपुर के इस मामले में लड़की का शव फांसी पर लटका मिला था। पति पर दहेज प्रताड़ना, चोट पहुंचाने और आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा चल रहा था लेकिन सत्र अदालत ने रिकार्ड पर मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए 16 मई 2016 को पति पर आइपीसी की धारा 302 में हत्या का भी अतिरिक्त आरोप तय कर मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। लेकिन हाई कोर्ट ने 10 जनवरी 2018 को पति की पुनरीक्षण याचिका पर सत्र अदालत का धारा 302 में मुकदमा चलाने का आदेश रद कर दिया।गत गुरुवार को याचिकाकर्ता के वकील डीके गर्ग ने बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हत्या में ट्रायल शुरू होने के करीब 14 महीने बाद हाई कोर्ट ने सत्र अदालत का 302 में मुकदमा चलाने का आदेश रद किया। हाईकोर्ट ने जब आदेश रद किया तब तक हत्या के ट्रायल में अभियोजन पक्ष के सभी 12 गवाहों के बयान और जिरह हो चुकी थी।

गर्ग ने कोर्ट को मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी दिखाई जिसमें शव पर चोट के निशान पाए जाने की बात दर्ज है। उन्होंने कहा कि शव के पास सुसाइड नोट भी मिला था लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर मृतका के ही हैं।दूसरी ओर आरोपित पति की ओर से पेश वकील का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट को अभी मामले में दखल नहीं देना चाहिए क्योंकि अभियोजन पक्ष को छूट मिली है कि पर्याप्त सुबूत मिलने पर वह अलग से इस बारे में अर्जी दे सकता है।

पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट का आदेश रद करते हुए कहा कि हाईकोर्ट को उन मामलों में पुनरीक्षण शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जहां धारा 302 में लगाए गए अतिरिक्त आरोपों पर ट्रायल चल रहा हो और अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों का परीक्षण हो चुका हो। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मुकदमा जल्द से जल्द निबटाने का आदेश देते हुए विशेष अनुमति याचिका निस्तारित कर दी।

क्या था मामला

केस के मुताबिक याचिकाकर्ता की बेटी नीरज की शादी 1999 में कृष्णवीर उर्फ पिंटू से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही उसे पति और सास ने सताना शुरू कर दिया। 2012 में नीरज के पिता के रिटायर होने के बाद पति और सास उस पर पिता से पांच लाख रुपये लाने का दबाव डालने लगे। जब वह इसके लिए राजी नहीं हुई तो उसके साथ बुरा बर्ताव होने लगा। 10 जून 2014 को नीरज का शव फांसी पर लटका मिला।