क्‍या तुर्की और इजरायल के तल्‍ख रिश्‍तों में आएगी नरमी ? दोनों देशों के राष्‍ट्रपतियों ने फोन पर की वार्ता


क्‍या तुर्की और इजरायल के तल्‍ख रिश्‍तों में आएगी नरमी। फाइल फोटो।

इजरायल के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति इसाक हर्जोग और तुर्की में उनके समकक्ष राष्‍ट्रपति रैसेप तैयप एर्दोगन के बीच फोन पर हुई वार्ता सुर्खियों में है। इस वार्ता के यह संकेत निकाले जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच ठंडे पड़ चुके रिश्ते पहले से बेहतर होंगे।

इस्तांबुल, एजेंसी। इजरायल के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति इसाक हर्जोग और तुर्की में उनके समकक्ष राष्‍ट्रपति रैसेप तैयप एर्दोगन के बीच फोन पर हुई वार्ता सुर्खियों में है। इस वार्ता के यह संकेत निकाले जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच ठंडे पड़ चुके रिश्ते पहले से बेहतर होंगे। बता दें कि फिलीस्तीनियों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध काफी तल्‍ख रहते हैं। कई बार तुर्की, इजरायल को देखने की भी धमकी दे चुका है। राष्ट्रपति इसाक पिछले सप्ताह ही इसरायल की संसद क्नेसेट से चुने जाने के बाद पदभार संभाला है। इसके लिए जून को मतदान हुए थे।

इजरायल और फिलीस्तीनियों में टकराव चरम पर

दोनों देशों के बीच संबंधों में यह नरमी ऐसे वक्‍त आई है, जब दो महीने पूर्व इजरायल और फिलीस्तीनियों में टकराव चरम पर था। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने दुनियाभर के मुस्लिम देशों के प्रमुखों से बात करके इजरायल के खिलाफ एक्शन लिए जाने की मुहिम शुरू की थी। इतना ही नहीं एर्दोगन ने इजरायल को घेरने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर भी वार्ता की थी। एर्दोगन ने पुतिन से बातचीत में कहा कि फिलिस्तीनियों पर हमले को लेकर इजरायल को कड़ा सबक सिखाए जाने की जरूरत है।

पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए बेहतर संबंध जरूरी

इजरायली राष्‍ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के लिए भी इस सहयोग में काफी संभावनाएं हैं। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी बयान के अनुसार दोनों नेता इस बात पर राजी है कि की तमाम गतिरोधों के बावजूद चल रही ये बातचीत बेहद महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि इसरायल और तुर्की एक समय बेहद करीबी साझेदार थे, लेकिन एक दशक से दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तुर्की सरकार अक्सर फलस्तीनियों के प्रति इसरायल की नीतियों की निंदा करती है।

कश्‍मीर मुद्दे पर पाकिस्‍तान के नजदीक है तुर्की

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में भी कश्मीर का मुद्दा उठाया हैं। है। एर्दोगन के इस रुख पर भारत कई बार अपनी कड़ी आपत्ति जता चुका है। तुर्की के इस स्‍टैंड पर भारत ने अपनी आपत्ति जताई है। भारत ने तुर्की को करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने नसीहत देते हुए कहा है कि कश्मीर जैसे गंभीर मसले पर बयान देने से पहले तुर्की को अपनी नीतियों की गहराई से समीक्षा करनी चाहिए।