मौसम वेधशाला: यहां मौसम की टटोली जाती है नब्ज, आपको बताया जाता है ताजा हाल; ऐसे लगाया जाता है पूर्वानुमान

 


मौसम का ताजा हाल आपको यहींं से मिलता है।

आज गर्मी कितनी है आज पानी कितना बरसा आज कितनी सर्दी है आदि सवालों से रोज हमारा सामना होता है। आइए जानते हैं मौसम से जुड़े कुछ बेहद प्रचलित शब्द और इस बारे में कि किस तरह उनसे जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं।

मेरठ। आज गर्मी कितनी है, आज पानी कितना बरसा, आज कितनी सर्दी है, आदि सवालों से रोज हमारा सामना होता है। हम सदैव मौसम संबंधी जानकारी को लेकर अपडेट रहना चाहते हैं। आइए, जानते हैं मौसम से जुड़े कुछ बेहद प्रचलित शब्द, और इस बारे में कि किस तरह उनसे जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं। मौसम की नब्ज मापने के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में वेधशाला स्थित है। यहां आंकड़ों का संकलन कर दिल्ली स्थित प्रादेशिक कार्यालय भेजे जाते हैं, जहां समग्र आंकड़ों का विश्लेषण कर पूर्वानुमान जारी किया जाता है। आसपास के जनपदों में दिल्ली के बाद मेरठ में ही मौसम विभाग की वेधशाला है जहां मैनुअली और आटोमैटिक दोनों ही प्रणाली मौजूद है। यहां से अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा, और बारिश की मात्र, संबंधी आंकड़े दिल्ली स्थित प्रादेशिक कार्यालय भेजे जाते हैं, जहां से इन्हें जारी किया जाता है। अन्य आंकड़ों को मौसम वैज्ञानिकों के अध्ययन के लिए जुटाया जाता है। आटोमैटिक वेदर स्टेशन सीधे पुणो की केंद्रीय इकाई से जुड़ा है।

अधिकतम व न्यूनतम तापमान: वेधशाला में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के लिए तापमापी लगे हैं। यह तापमान मापी लकड़ी के एक बाक्स में लगे होते हैं। अधिकतम तापमान मापी से दिन में रीडिंग नोट की जाती है। मुख्यत: यह समय दोपहर बाद का होता है। इस तापमान मापी में जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जाता है, पारा चढ़ता है। इसकी खासियत यह है कि इसका पारा उच्चतम बिंदु पर टिक जाता है, नीचे नहीं गिरता। दिन में किसी भी समय जब तापमान उच्चतम बिंदु पर पहुंचता है, उसकी माप ले ली जाती है। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान मापी इसके विपरीत कार्य करता है। यह रीडिंग रात में किसी भी समय दर्ज होती है, इसे अल सुबह नोट किया जाता है।

आर्द्रता: वेधशाला में लकड़ी के बाक्स में चार तापमान मापी होते हैं। दो मापी तो अधिकतम और न्यूनतम तापमान नापने के होते हैं, जबकि दो मापी वेट बल्ब और ड्राइ बल्ब के रूप में होते हैं। ड्राइ बल्ब से किसी भी समय हवा या वातावरण का तापमान मापा जाता है। वेट बल्ब में एक गीला कपड़ा बांधा जाता है। यह दर्शाता है कि उमस का तापमान कितना है। वेट बल्ब की माप हमेशा ड्राइ बल्ब से कम होती है लेकिन जहां तक मानव को प्रभावित करने वाली गर्मी का संबंध है, इसकी माप अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वेट बल्ब व ड्राई बल्ब की रीडिंग नोटकर गणितीय फार्मूले से वातावरण में व्याप्त आर्द्रता निकाली जाती है, यह प्रतिशत में होती है। आर्द्रता जितनी ज्यादा होती है बारिश की संभावना उतनी बढ़ जाती है। मंगलवार को मेरठ में अधिकतम आर्द्रता 100 और न्यूनतम 80 दर्ज की गई। हालांकि बारिश के लिए मौसम के कई अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं।

महत्वपूर्ण है मेरठ की वेधशाला

दिल्ली के बाद मौसम विभाग की वेधशाला मेरठ में है। गाजियाबाद और बुलंदशहर में केवल आटोमैटिक वेदर स्टेशन हैं, यहां मैनुअली डाटा संकलन नहीं होता। बरेली में मेरठ से उच्चीकृत वेधशाला है। वहां बैलून उड़ाकर हवा की गति और बादलों के बारे में जानकारी की जाती है, मेरठ में ऐसा नहीं होता। इसके अलावा जहां-जहां एयरपोर्ट हैं, वहां 24 घंटे कार्य करने वाली वेधशालाएं होती हैं। वहां दृश्यता मापी उपकरण लगे होते हैं जो हवाई जहाज के संचालन में महत्वपूर्ण है। इसके अलावा हवा की गति मापने के लिए उच्चीकृत उपकरण होते हैं।

ऐसे होती है औसत बारिश की गणना

किसी भी जनपद में औसत बारिश कितनी होती है, इसके लिए मौसम विभाग 30 साल के आंकड़ों का आकलन करता है। सीसीएसयू स्थित वेधशाला के अलावा बारिश मापने के लिए मवाना और सरधना में आटोमैटिक रेन गेज स्थापित हैं। वर्तमान में 1981 से 2010 तक के आंकड़ों के आधार पर औसत बारिश की गणना की गई है। सामान्य अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान भी उक्त अवधि के वास्तविक तापमान के आधार पर निकाले जाते हैं। मेरठ में वर्ष भर में औसतन 732.7 मिलीमीटर बारिश होती है। जून से सितंबर तक होने वाली मानसून सीजन की औसत बारिश 607.7 मिलीमीटर है।

ऐसे जारी होता है पूर्वानुमान

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मौसम केंद्र प्रभारी डा यूपी शाही बताते हैं कि आटोमैटिक वेधशाला सेंसर आधारित होती है। बिजली आपूíत और सिग्नलों में उतार चढ़ाव अथवा सेंसर पुराने हो जाने पर इसके आंकड़ों में कभी-कभी अंतर हो जाता है इसीलिए मैनुअली तरीके से आंकड़े जुटाने की भी व्यवस्था रहती है। इसके आंकड़े ज्यादा विश्वसनीय होते हैं। मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक इन आंकड़ों को सेटेलाइट से प्राप्त चित्रों से मिलान करते हैं। इसके बाद जनपद स्तर पर बारिश और मौसम कैसा रहेगा, इसके बारे में पूर्वानुमान जारी किया जाता है। स्थानीय आंकड़े जितने सटीक होंगे, पूर्वानुमान भी उतना ही सटीक होगा।

वाष्पीकरण की माप

एक मीटर व्यास के लौह पात्र में पानी भरा होता है। इसमें भी मापक लगा होता है। इसे सुबह भर दिया जाता है, फिर देखते हैं कि धूप में कितने पानी का वाष्पीकरण हुआ। यह भी बारिश के पूर्वानुमान में काफी सहायक होता है। इससे बादलों के बनने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी होती है।

दो और वेधशालाएं

मेरठ में मौसम विभाग के अलावा सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि और कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में भी मौसम वेधशाला हैं। यह दोनों वेधशालाएं, संस्थानों द्वारा अनुसंधान और किसानों को कृषि आधारित भविष्यवाणी उपलब्ध कराने के लिए हैं।

वर्षा की नाप

यह प्लास्टिक का एक बीकरनुमा उपकरण होता है जिसमें बारिश का पानी छनकर अंदर जाता है। जितनी बारिश होती है, मिलीमीटर में उसे नोट किया जाता है। बारिश का आंकड़ा शाम 5.50 बजे से अगले दिन 5.30 बजे तक जारी होता है। मंगलवार को यह 17 मिलीमीटर था।

हवा की दिशा और गति

यहां हवा की दिशा और गति नापने का भी यंत्र लगा है। इसमें लगे मीटर से प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा की गति का पता चल जाता है।

वायुदाब

वर्षा और आंधी आदि के पूर्वानुमान के लिए उस क्षेत्र के वायु दाब की गणना महत्वपूर्ण होती है। वेधशाला में वायुदाब मापी बैरोमीटर भी लगा है। इसकी रीडिंग भी पूर्वानुमान जारी करने के लिए नोट की जाती है।