COVID-19 का ग्रामीण भारत पर हुआ बुरा असर, रोजगार की समस्या हो रही है गंभीर

 

विश्व में फैली कोरोना महामारी के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था गंभीर स्थिति में है।

भारत में कोविड-19 संक्रमण फैलने के बाद से अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। लाखों लोग बेरोजगार होकर शहरों से वापस अपने घर गांवों की ओर लौट गए। मौजूदा वक्त में परिस्थिति ये है कि गरीबी से परेशान लोग कर्जा लेकर अपने खाने का इंतजाम कर रहे हैं।

लखनऊ,रॉयटर्स: विश्व में फैली कोरोना महामारी के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था गंभीर स्थिति में है। पिछले साल महामारी रोकने के मकसद से लगाए गए लॉकडाउन ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया। कुछ ऐसी ही स्थिति भारत में भी है। यहां कोविड-19 संक्रमण फैलने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। लाखों लोग बेरोजगार होकर शहरों से वापस अपने घर-गांव की ओर लौट गए। मौजूदा वक्त में परिस्थिति ये है कि, गरीबी से परेशान लोग कर्जा लेकर अपने खाने का इंतजाम कर रहे हैं।

दैनिक आय की समस्या गंभीर

भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में, आठ गांवों के 75 परिवारों के साथ बातचीत में सामने आया है कि, उनकी घरेलू आय में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, लगभग दो-तिहाई परिवारों ने कर्ज लिया हुआ है। एजेंसी द्वारा चिन्हित किए गए परिवारों में एक परिवार आशा देवी का भी है, जिनके पति पंजाब के एक शहर में मजदूरी का काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन में उनकी नौकरी चली गई औऱ उन्हें वापस घर आना पड़ा और आज स्थिति ये है कि उन्हें अपने परिवार के लिए एक वक्त का खाना जुटाने में भी मुश्किल हो रही है।

सरकार के इंतजाम पर्याप्त नहीं

एजेंसी के साथ बातचीत में आशा ने बताया कि देश की सरकार ने गरीबों के लिए मुफ्त राशन का वादा किया है, लेकिन राशन सीमित है और परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है। उनके परिवार में सात लोग हैं, खाने की आपूर्ति के लिए उन्होंने अपनी जमीन बीस हजार रुपए पर गिरवी रखी थी। इस पैसे से उन्होंने 6 महीने तक अपनी जरूरतें पूरी की, लेकिन अब पैसे समाप्त हो गए हैं और उनके पति को कहीं रोजगार नहीं मिल रहा है। उनके पति और कई अन्य लोग जिनकी नौकरी छूट गई है, काम की उम्मीद में हर दिन अपने गांव के पास एक ईंट भट्टे के आसपास भीड़ लगाते हैं। परंतू उन्हें खाली हाथ ही वापस आना पड़ता है।

अर्थशास्त्रियों की क्या है राय

देश के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में बड़ा कर्ज और कम आय सरकार द्वारा उत्पन्न किसी भी आर्थिक सुधार को विफल कर देगी। साथ ही उनकी निजी बचत और निवेश को भी उम्मीद से अधिक समय तक प्रभावित करता रहेगा। 31 मार्च को समाप्त हुए आर्थिक वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में रिकॉर्ड 7.3फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने 2021-22 के लिए 10.5फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन महामारी की एक दूसरी लहर ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जिसके चलते कई अर्थशास्त्रियों ने अपने पूर्वानुमानों में कटौती की है।