अंबेडकर विश्वविद्यालय छात्रा की दो टूक, SC-ST छात्रों के हक में उठाई थी आवाज, नहीं भरूंगी जुर्माना


अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग के छात्रों के हक की आवाज उठाई थी।

अंबेडकर विश्वविद्यालय के वर्चुअल दीक्षा समारोह में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर टिप्पणी करने के बाद लगाए गए जुर्माने को छात्रा नेहा ने जमा करने से इन्कार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग के छात्रों के हक की आवाज उठाई थी।

नई दिल्ली,  संवाददाता। अंबेडकर विश्वविद्यालय के वर्चुअल दीक्षा समारोह में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर टिप्पणी करने के बाद लगाए गए जुर्माने को छात्रा नेहा ने जमा करने से इन्कार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग के छात्रों के हक की आवाज उठाई थी, किसी तरह के असंसदीय और अमर्यादित शब्द नहीं कहे थे, इसलिए माफी मांगने और जुर्माना भरने का सवाल ही नहीं उठता।

विश्वविद्यालय द्वारा जुर्माना लगाया जाना सच व हक की लड़ाई को दबाने का प्रयास है। नेहा दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले अंबेडकर विश्वविद्यालय में स्कूल आफ कल्चर एंड क्रिएटिव एक्सप्रेशन में परास्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह विश्वविद्यालय में आरक्षण नीति में हुए बदलाव और एससी-एसटी वर्ग के हक पर हो रहे हमले को लेकर एक साल से आवाज उठा रही हैं। विश्वविद्यालय में पहले एससी-एसटी वर्ग की फीस माफ करने का प्रविधान था, वह खत्म कर दिया गया। अब इस वर्ग के दूसरे राज्यों के छात्रों से दिल्ली के ही जाति प्रमाण पत्र की मांग की जा रही है, जिससे छात्र बहुत परेशान हैं। इस संबंध में वह बीते वर्ष उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यालय गई थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।नेहा ने बताया कि उन्होंने 23 दिसंबर 2020 को यूट्यूब पर लाइव प्रसारित हुए दीक्षा समारोह के दौरान भी इसी विषय को लेकर टिप्पणी की थी। उनका आरोप है कि उनके साथ कई अन्य छात्रों ने भी टिप्पणियां की थीं, लेकिन उन्हें अकेले जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने भी विश्वविद्यालय की विद्यार्थी अनुशासन संहिता को पढ़ा है, जिसके अनुसार उनके द्वारा उठाए गए सवाल संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्वविद्यालय ने नेहा को नोटिस जारी किया है, जिसके अनुसार उन्हें छात्रों के लिए निर्धारित और अधिसूचित अनुशासन संहिता का उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही यह भी कहा है कि जुर्माना न भरने पर वह परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगी।नेहा के आरोपों पर सहायक कुलसचिव (जनसंपर्क) का कहना है कि छात्रों में अनुशासन बनाए रखने के लिए समय-समय पर कदम उठाते हैं। नेहा को दिया गया नोटिस भी इसी का हिस्सा है। अब उन्हें जो बात कहनी है, वह विश्वविद्यालय की कमेटी के सामने कहें।