कश्मीर के हारि पर्वत किले पर शान से लहराया 100 फीट ऊंचा तिरंगा, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया अनावरण

 


इस पर राष्ट्रध्वज का मतलब भारत और भारतीयता का अलगाववाद पर, सांप्रदायिकता पर जीत का प्रतीक होगा।
कश्मीर की सनातन संस्कृति में हारि पर्वत का बहुत महत्व है। कहा जाता पौराणिक काल मे श्रीनगर में एक बड़ा दैत्य जालोभाव रहता था। वह लोगों को बहुत सताता था। लोगों ने भगवान की शिव की अर्धांगिनी मां पार्वती की पूजा की और उनसे जालोभाव से मुक्ति का आग्रह किया।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। बसंती रुत चमन से मांग कर के इत्र मल जाए/ घटा अमृत बनकर के बरसने को मचल जाए/ तिरंगे की गजब है शान जब लहराए अंबर में/ दिशाएं होड़ करती हैं हवा इस ओर चल जाए।

हारि पर्वत पर स्थित किले की प्राचीर पर स्थापित 100 फुट ऊंचे स्तंभ पर रविवार की सुबह स्वतंत्रता दिवस के माैके पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा राष्ट्रध्वज का अनावरण किया। डाउन-टाउन में स्थित हारि पर्वत ग्रीष्मकालीन राजधानी के गौरवशाली इतिहास, सभ्यता और संस्कृति का वाहक है। यह कश्मीर की सनातन हिंदु संस्कृति अौर भारतीयता का प्रतीक है।

हारि पर्वत पर स्थित किले के कोह-ए-मारान का किला भी कहते हैं। इसका निर्माण 1808 में अफगान गर्वनर अता मोहम्मद खान ने कराया था। इससे पूर्व इस इलाके में मुगल शासक अकबर ने 1509 में सैन्य छावनी बनवाई थी। मुगल सैनिक अपनी छावनी में ही ज्यादातर रहते थे। कश्मीर में इस्लामिक आक्रांताओं के शासन और इस्लाम के बढ़ते प्रभाव के कारण ही हारि पर्वत का नाम भी कोह ए मारान हो गया था।

कश्मीर की सनातन संस्कृति में हारि पर्वत का बहुत महत्व है। कहा जाता पौराणिक काल मे श्रीनगर में एक बड़ा दैत्य जालोभाव रहता था। वह लोगों को बहुत सताता था। लोगों ने भगवान की शिव की अर्धांगिनी मां पार्वती की पूजा की और उनसे जालोभाव से मुक्ति का आग्रह किया। मां सती ने एक चिड़िया जिसे कश्मीर में हारि कहते हैं, का रुप धारण किया और उस एक कंकर उठा उस जगह रख दिया, जहां से जालोभाव पाताल से जमीन पर आकर लोगों को तंग करता था। कुछ मान्यताओं के मुताबिक, मां सती ने चिड़िया रुप में पत्थर उठाकर राक्षस के सिर पर रख दिया जो धीरे धीरे आकार मे बढ़ता गया अौर राक्षस का सिर कुचला गया। इस तरह वह राक्षस मृत्यु काे प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि जिस पत्थर को मां पार्वती ने राक्षस के सिर पर रखा था, वह आज ही विद्यमान है अौर उस शिला को कश्मीरी पंडित मां सती का रुप मानकर पूजते हैं। मां सती को कश्मीरी त्रिपूर सुंदरी भी पुकारते हैं और वह श्रीनगर की अधीष्ठ देवी भी हैं। यहां माता स्वयंभू श्रीचक्र के रुप में विराजमान हैं।

100 फुट ऊंचा स्तंभ जिस पर राष्ट्रध्वज फहराया जाना है, श्रमिकों ने करीब छह दिन में पहाड़ी के नीचे से ऊपर किले में पहुंचाया है। करीब 45 श्रमिकों ने इसे ऊपर पहुंचने और इसे स्थापित करने के लिए इसकी नींव तैयार करने से लेकर इसे खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। स्तंभ का वजन छह टन है जबकि इस पर फहराए जाने वाले ध्वज 24 फुट चौढ़ा और 36 फीट लंबा होगा। इतवार को जब उपराज्यपाल इसको अनावृत करते हुए फहराएंगे तो सेना, पुलिस और अर्धसेनिकबलों जवान भी सलामी देंगे। बड़ी संख्या मे स्थानीय लोग भी मौजूद रहेंगे।

मंडलायुक्त कश्मीर पांडुरंग के पाले ने बताया कि हारि पर्वत एक तरह से श्रीनगर शहर का केंद्र भी है। डल झील के पश्चिम में स्थित हारि पर्वत पूरे शहर में कहीं से भी खड़े होकर देखा जा सकता है। इसके अलावा यह श्रीनगर में सबसे ऊंचा है। इस पर राष्ट्रध्वज फहराने और इसके लिए स्तंभ स्थापित करने की अनुमति भारतीय पुरातत्व विभाग स प्राप्त की गई है। संबंधी काउंसिलर आकिब अहमद रेंजु ने कहा कि हारि पर्वत पर तिरंगा जरुर चाहिए, क्योंकि हारि पर्वत जिसे हम कोह ए मारान भी पुकारते हैं, तभी से है,जब से कश्मीर और कश्मीरी हैं। इस पर राष्ट्रध्वज का मतलब भारत और भारतीयता का अलगाववाद पर, सांप्रदायिकता पर जीत का प्रतीक होगा। इसलिए हमने इस पर राष्ट्रध्वज फहराए जाने का प्रस्ताव रखा था और पूरी योजना तैयार की है।