14 अगस्त को ही गुरदासपुर व पठानकोट हो गए थे आजाद, पाकिस्तान ने भेज दिए थे डीसी और एसपी, जानें रोच‍क कहानी

 


स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे के साथ गुरदासपुर की पावनी। जागरण
पंजाब का सबसे संवेदनशील जिला गुरदासपुर और पठानकोट देश से एक दिन पहले 14 अगस्त को ही आजाद हो गए थे। दो दिन बाद इसे भारत में शामिल किया गया था। आइए जानते हैं इनके भारत में शामिल होने की रोचक कहानी।

गुरदासपुर। स्वतंत्रता दिवस को लेकर पंजाब सहित देश वासियों में भारी उत्साह है। ऐसे में इतिहास के पन्नों को खोलकर देखा जाए तो कई रोचक तथ्य सामने आते हैं। पंजाब का सबसे संवेदनशील जिला गुरदासपुर और पठानकोट देश से एक दिन पहले 14 अगस्त को ही आजाद हो गए थे। दो दिन बाद इन्हें भारत में शामिल किया गया। दरअसल, बंटवारे के समय पहले गुरदासपुर को पाकिस्तान में शामिल कर दिए गया था। उस वक्त पठानकोट भी गुरदासपुर जिले की ही तहसील हुआ करता था। पाकिस्तान ने गुरदासपुर का चार्ज लेने के लिए अपने डीसी और एसपी भी रवाना कर दिए थे। दो दिन तक गुरदासपुर पाकिस्तान का हिस्सा रहा था।

शकरगढ़ पाकिस्तान और बाकी तीन तहसील भारत में शामिल

15 अगस्त, 1947 को देश आजाद होने के बाद 16 अगस्त को जिला गुरदासपुर की चार तहसीलों में एक शकरगढ़ को पाकिस्तान में रखा गया और पठानकोट तहसील (मौजूदा समय में जिला) सहित बाकी हिस्सा भारत में घोषित किया गया। इस बात को 17 अगस्त को सार्वजनिक किया गया। इस फैसले के बाद जिला गुरदासपुर में मौजूद मुस्लिम बिरादरी को सुरक्षित पाकिस्तान पहुंचाने के लिए गांव पनियाड़ में रिफ्यूजी कैंप लगाया गया था। इस कैंप में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु भी पहुंचे थे। यह कैंप दो महीने तक संचालित किया गया।

आजादी के वक्त गुरदासपुर में 56.4 फीसद मुस्लिम आबादी 

1947 में भारत-पाक बंटवारे के दौरान पंजाब के बंटवारे के लिए रैडक्लिफ कमीशन बनाया गया जिसका अध्यक्ष ब्रिटिश बैरिस्टर सिरिल रैडक्लिफ को बनाया गया। उन्होंने बंटवारे के लिए 1941 में हुई जनगणना को आधार बनाया। उस वक्त जिला गुरदासपुर में 56.4 फीसद मुस्लिम आबादी थी। ऐसे में गुरदासपुर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया। उस समय गुरदासपुर में चार तहसील गुरदासपुर, बटाला, पठानकोट और शकरगढ़ शामिल थीं। शकरगढ़ तहसील रावी दरिया के पार पाकिस्तान की ओर थी।

पाकिस्तान ने गुरदासपुर का चार्ज लेने भेजे थे अपने डीसी व एसपी

इतिहासकार प्रो. राज कुमार कहते हैं कि गुरदासपुर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाए जाने की संभावनाओं को देखते हुए शहर के अमीर परिवारों ने बच्चों, महिलाओं और कीमती सामान को ब्यास दरिया के पार भारत की सीमा में भेजना शुरू कर दिया था। 14 अगस्त को पाकिस्तान ने अपने डीसी और एसपी को चार्ज लेने के लिए गुरदासपुर भेज दिया था।