तालिबान ने कंधार और हेरात में बंद भारतीय दूतावासों के अंदर घुसकर की तलाशी, दस्तावेज-गाड़ी ले गए


कंधार और हेरात में बंद भारतीय वाणिज्य दूतावासों के अंदर घुसे तालिबानी।(फोटो: एएफपी)
तालिबान ने बुधवार को कंधार और हेरात में स्थित बंद भारतीय वाणिज्य दूतावासों की तलाशी ली। तालिबानी दूतावासों में लगे ताले तोड़कर अंदर घुस गए। इस दौरान वे कथित तौर पर कुछ दस्तावेज ले गए। वहां खड़े वाहनों को भी साथ ले गए।

नई दिल्ली, आइएएनएस। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने बुधवार को कंधार और हेरात में स्थित बंद भारतीय वाणिज्य दूतावासों की तलाशी ली। सुरक्षा व्यवस्था के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान ने दो दिन पहले कंधार और हेरात में बंद भारतीय वाणिज्य दूतावासों की तलाशी ली और इस तलाशी के दौरान कथित तौर पर दोनों मिशनों से कुछ दस्तावेज ले लिए। सूत्रों के मुताबिक, तालिबानियों ने वाणिज्य दूतावास की इमारतों में सेंध लगाई और वहां खड़े वाहनों को भी अपने साथ ले गए।

भारत के अफगानिस्तान के कंधार, हेरात, मजार-ए-शरीफ और जलालाबाद में कुल मिलाकर चार भारतीय वाणिज्य दूतावास हैं। जिन्हें15 अगस्त को तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा के बाद बंद कर दिया गया था। अफगानिस्तान में गंभीर स्थिति के बीच भारतीय दूतावास के कर्मिचारियों को मंगलवार को भारतीय वायु सेना के सी-17 विमान द्वारा काबुल हवाई अड्डे से आईटीबीपी कर्मियों सहित 120 भारतीयों के साथ वापस लाया गया था। अफगानिस्तान में गंभीर स्थिति के बीच, भारतीय दूतावास के कर्मियों को मंगलवार को भारतीय वायु सेना के सी-17 विमान द्वारा काबुल हवाई अड्डे से आईटीबीपी कर्मियों सहित 120 भारतीयों को वापस लाया गया।

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में शेष भारतीय नागरिकों को निकालने पर भी चर्चा की गई जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वापस लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। अगले कुछ दिनों में और सहायता के लिए भारत की ओर देख रहे अफगान भाइयों और बहनों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए भारत कदम उठाएगा। इससे जुड़े एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है।

इससे जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने वीजा की एक नई श्रेणी, ई-आपातकालीन एक्स-विविध वीजा" भी पेश किया है जिसके तहत सभी अफगान नागरिक भारत आने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपातकालीन वीजा पहले छह महीने के लिए वैध होगा। पहले काबुल में भारतीय दूतावास कम कर्मचारियों के साथ काम कर रहा था लेकिन वहां गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने उन सभी को वापस बुलाने का फैसला किया।