केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा- उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा

 

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा।(फोटो: दैनिक जागरण)
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा- धरती माता ही हमारा ग्रह कोई प्लैनेट बी नहीं है। उनका कहना था कि आज दुनिया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रोक भी ले फिर भी जमा हो चुकीं ग्रीन हाउस गैसें जलवायु संबंधी असर पहुंचाएंगी। इसके लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन उपायों पर विचार जरूरी है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि एक टिकाऊ जीवनशैली की जरूरत है क्योंकि उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा, 'धरती माता ही हमारा ग्रह हैं और कोई प्लैनेट बी नहीं है।' पर्यावरण मंत्री ने यहां एक व्याख्यान में कहा कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। उनका कहना था कि आज दुनिया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रोक भी ले, फिर भी जमा हो चुकीं ग्रीनहाउस गैसें जलवायु संबंधी असर पहुंचाएंगी। इसके लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन उपायों पर विचार जरूरी है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा, 'विकासशील देश उनकी बड़ी आबादी के आजीविका के लिए जलवायु संवेदनशील क्षेत्रों पर निर्भरता के कारण जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रभावों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं।' उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक रणनीतियां न केवल प्रभाव कम करने पर केंद्रित होनी चाहिए बल्कि जलवायु अनुकूलन पर भी केंद्रित होनी चाहिए जिसमें वित्त और प्रौद्योगिकी के प्रावधान के लिए स्पष्ट रूपरेखा हो।

भूपेंद्र यादव ने कहा, 'टिकाऊ जीवनशैली जरूरी है क्योंकि उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। आदत और रवैया समाधान का बड़ा हिस्सा हैं। समानता और जलवायु न्याय किसी वैश्विक जलवायु प्रतिक्रिया की कसौटी होनी चाहिए, तभी हम कह सकते हैं कि हमने वो रणनीतियां अपनाई हैं जो न्यायोचित हैं और धरती माता के लिए सम्मान हैं, जो हमारा एकमात्र ग्रह है। कोई प्लेनेट बी नहीं है।'

यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टिकाऊ विकास के सभी स्तंभों पर बहुआयामी सोच रखी है जिसमें जैव विविधता संरक्षण, कचरा पुनर्चक्रण, एकल उपयोग वाली प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से हटाना, जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा जैसे प्रमुख उपाय हैं।