चंडीगढ़ शिक्षा विभाग पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट में दी गलत जानकारी, नौकरी छोड़ चुके शिक्षकों के नाम भी शामिल

 


सुप्रीम कोर्ट ने विभाग को चार महीने का समय दे दिया है।
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती में पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई की 13 अगस्त को हुई। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के वकील ने दलील दी कि 773 टीचर्स शिक्षा विभाग में वर्किंग हैं जिन्हें सुनवाई के लिए सम्मन नहीं पहुंचा है।

चंडीगढ़। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती में पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई की 13 अगस्त को हुई। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के वकील ने दलील दी कि 773 टीचर्स शिक्षा विभाग में वर्किंग हैं, जिन्हें सुनवाई के लिए सम्मन नहीं पहुंचा है। ऐसे में चार सप्ताह का समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने विभाग को चार महीने का समय दे दिया है, लेकिन हैरत की बात है कि शिक्षा विभाग द्वारा 773 टीचर्स का दिया गया डाटा गलत है। शिक्षा विभाग के ढीले रवैया को देखते हुए पांच सौ से ज्यादा टीचर्स विभाग को छोड़ चुके हैं लेकिन जो टीचर्स विभाग को छोड़कर गए उनकी जानकारी विभाग के पास नहीं है और सुप्रीम कोर्ट में उनका नाम विपक्ष पार्टी में शामिल किया गया है।

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में मामले को लेकर नवंबर 2019 में फैसला आया था। उस समय विभाग के पास टीचर्स की संख्या 773 थी, लेकिन विभाग ने हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की दलील देने लगा जिसे देखते हुए डेढ़ सौ के करीब अध्यापक नौकरी छोड़ गए। यह टीचर्स हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में जाकर स्थायी नौकरी करना शुरू हो चुके हैं। शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज कराया और जब तक पहली सुनवाई की डेट तय हुई तो टीचर्स छोड़कर जा चुके हैं और चंडीगढ़ शिक्षा विभाग 773 टीचर्स के कार्यरत होने की दुहाई दे रहा है जो कि पूरी तरह से गलत है।शहर के सरकारी स्कूलों से काम छोड़ने वाले कर्मचारियों में गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेेंडरी स्कूल मनीमाजरा हाउसिंग कांप्लेक्स से आकाश शर्मा, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-38 को छोड़ने वाले वैभव राय, कॉलाेनी नंबर-4 के स्कूल से नौकरी छोड़ चुके मुकेश कुमार भी शामिल हैं। 

यह है पूरा मामला

वर्ष 2014 में चंडीगढ़ शिक्षा विभाग 1149 पोस्टों के लिए भर्ती शुरू की गई थी। अगस्त 2015 में टीचर्स को ज्वाइनिंग दी गई। मई 2017 में भर्ती प्रक्रिया से पहले लिखित परीक्षा का पेपर लीक होने का खुलासा हुआ था। पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने भर्ती को रद कर दिया था। टीचर्स विभाग के फैसले को कैट में चुनौती दी। जहां पर चार्जशीट में शामिल टीचर्स को को छोड़कर अन्य 11 सौ टीचर्स की ज्वाइनिंग के आदेश शिक्षा विभाग को दिए गए। शिक्षा विभाग कैट के इस फैसले के खिलाफ सितंबर-अक्टूबर 2019 में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने भी कैट के फैसला सुरक्षित रखते हुए टीचर्स की ज्वाइनिंग के आदेश दिए। इसके बाद शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।