अबकी बार सुहागनगरी की शिमला मिर्च का होगा इंतजार, ये है कारण

 

सुहागनगरी की खेती में आलू के बाद शिमला मिर्च की देश भर में पहचान है।
 बारिश से चौपट हुई 40 फीसद से ज्यादा पौध खेतों में भरा पानी। नई पौध तैयार करेंगे किसान अक्टूबर के आखिरी में आएगी फसल। 25 दिनों में पौध तैयार होने के बाद खेतों में रोपी जाती है और 55 से 70 दिनों के बीच फसल आ जाती है।

आगरा। दिल्ली से लेकर पंजाब तक अबकी बार सुहागनगरी फीरोजाबाद की शिमला मिर्च के स्वाद का इंतजार होगा। जुलाई में हुई जोरदार बारिश से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। 40 फीसद से ज्यादा पौध तैयार होने के बाद पानी में सड़ गई तो 30 फीसद फसल खेतों में रोपे जाने के बाद खत्म हो चुकी है। पिछली साल बम्पर मुनाफा कमाने वाले किसान परेशान नजर आ रहे हैं।

सुहागनगरी की खेती में आलू के बाद शिमला मिर्च की देश भर में पहचान है। जून के आखिरी सप्ताह से शिमला मिर्च की पौध नर्सरी में तैयार होती है। 25 दिनों में पौध तैयार होने के बाद खेतों में रोपी जाती है और 55 से 70 दिनों के बीच फसल आ जाती है। अब तक सितंबर के आखिरी सप्ताह में शिमला मिर्च की तुड़ाई होने के बाद बाजार में आ जाती थी। जुलाई में हुई बारिश से नर्सरी में तैयार हो रही पौध और खेत में रोपी गई फसल बुरी तरह प्रभावित है। आलम यह है कि दर्जनों गांवों में खेतों में अब भी पानी भरा है। जहां पानी निकल चुका है, वहां नमी के चलते फसल नष्ट हो गई है। नारखी क्षेत्र के गढ़ी हंसराम निवासी शिमला मिर्च के बड़े उत्पादक राजेश प्रताप सिंह बूली का कहना है कि बीज तक सड़ गया है। इससे रकबा घटेगा और किसानों द्वारा तैयार की जा रही फसल सितंबर के आखिरी सप्ताह की जगह अब अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में आ पाएगी।

किसान नहीं उठा पाएंगे अबकी बार मौके का फायदा

मुख्यत: नारखी क्षेत्र में होने वाली शिमला मिर्च के किसानों के लिए मुख्य बाजारदिल्ली आजादपुर मंडी, चड़ीगढ़, कानपुर, जयपुर, बरेली और लखनऊ हैं। इसके अलावा मदर डेयरी और अन्य कंपनियां खेतों से फसल खरीदती हैं। सितंबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक फीरोजाबाद की फसल रहती थी। नवंबर में बरेली की फसल आती है तो दिसंबर में महराष्ट्र की सांगली और गुजरात में आणंद की फसल पहुंचती है। पहले राउंड में फायदा यहां के किसानों को होता था। अबकी बार फसल लेट होने के कारण फायदा नहीं हो पाएगा।

एक नजर

6000 हैक्टेयर: जिले में पिछले वर्ष हुई थी शिमला मिर्च

12000 हैक्टेयर: रकबा होने का था इस बार अनुमान

4000 हैक्टेयरः प्रभावित होने की आशंका

ये हैं हालात

50 फीसद

पौध प्रभावित हुई बारिश और नमी के कारण

40 फीसद

खेतों में रोपी गई थी जुलाई में शिमला मिर्च की फसल

30 फीसद 

रोपी हुई फसल बारिश से हुई प्रभावित

ये है खास

1.10 लाख: रुपये प्रति किलो आता है शिमला मिर्च

20 बीघा: खेत मेें एक किलो बीज लगता है

05 बार: सितंबर से मार्च तक होती है शिमला मिर्च की तुड़ाई

‘ आलू के बाद जिले की सबसे महत्वपूर्ण फसल शिमला मिर्च होती है। इस बार बारिश से पौध का नुकसान हुआ है। कई किसान दोबारा पौध तैयार कर रहे हैं। विभाग जल्दी सर्वे कराएगा।’