अफगानिस्तान से सुरक्षित कर्नाटक लौटे मेलविन, काबुल एयरपोर्ट पर दो दिन तक रहे थे भूखे

 

अफगानिस्तान से सुरक्षित कर्नाटक लौटे मेलविन, नाटो सैन्य शिविर के मेंटेनेंस में करते थे काम
रविवार को तालिबानी आतंकियों ने काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन पर भी कब्जा कर लिया। इसके साथ ही समूचे अफगानिस्तान पर आतंकी काबिज हो गए। दूसरे देशों ने वहां से अपने नागरिकों व दूतावास के राजनयिक व उनके परिवार वालों को आनन-फानन में निकालना शुरू कर दिया।

 मंगलुरु, प्रेट्र। अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होने के बाद वहां से बाहर आने वालों  में कर्नाटक के उल्लाल (Ullal) निवासी मेलविन (Melwyn) हैं जो वापस अपने घर पहुंचे हैं। मेलविन काबुल स्थित नाटो के सैन्य शिविर में अस्पताल के मेंटेनेंस विभाग में काम करते थे।  बुधवार को वे अपने देश भारत वापस लौटने में सफल हुए। उन्होंने अफगानिस्तान में भयावह मंजर का जिक्र किया जिसका उन्हें सामना करना पड़ा था। भारतीय वायु सेना  (IAF) के प्लेन से मेलविन भारत सुरक्षित लौट आए लेकिन उनके भाई नहीं आ सके। मेलविन ने बताया कि उनकी फोन पर बात हुई। भाई ने बताया कि अभी वे कतर जाने वाली फ्लाइट में हैं।  

उन्होंने बताया, 'हम काबुल एयरपोर्ट में दो दिनों तक बिना खाना-पानी के फंसे थे। मैं भाग्यशाली था कि मैं वहां से आराम से निकल आया। रात में जब वहां के एयरपोर्ट पर फ्लाइटों की लैंडिंग होती थी तो हजारों की भीड़ उमड़ आती थी।'  रिपोर्टरों से बात करते हुए मेलविन ने बताया कि  काबुल में भारतीय दूतावास के सुरक्षा अधिकारियों और उनकी कंपनी के सात कर्मचारियों समेत कुल 160 लोगों को बुधवार सुबह 5 बजे काबुल से एयरलिफ्ट किया गया और जामनगर के IAF बेस पर उतारा गया फिर वहां से वे दिल्ली आए और बुधवार को बेंगलुरु पहुंचे जहां से गुरुवार को उल्लाल आए।

उन्होंने बताया, 'हमारे आर्गेनाइजेशन ने कंपनी में काम करने वाले भारतीय मूल के लोगों को नार्वे लंदन और कर समेत अन्य विभिन्न जगहों पर भेज दिया है। उन्हें वहां क्वारंटीन रखा गया है आइसोलेशन की अवधि पूरी हो जाने के बाद ये सभी भारत लौट जाएंगे।' मेलविन के भाई डेमी (Demy) काबुल सैन्य शिविर में एयर कंडिशनिंग मेकैनिक के तौर पर काम कर रहे हैं। मेलविन ने बताया कि एयरपोर्ट पर उनके भाई सुरक्षित हैं और भारत के लिए उड़ान का इंतजार कर रहे हैं। अफगानिस्तान पर एक बार फिर से तालिबान ने अपना कब्जा कर लिया है और देश आजादी के 102वें साल के दौरान तालिबानी कब्जे में चला गया है। इस बीच तालिबान और युवा देशभक्तों के बीच राष्ट्रीय ध्वज को लेकर संघर्ष बढ़ने लगा है।